महराजगंज | RNews7 विशेष रिपोर्ट
महराजगंज जिले में परिवहन विभाग की चेकिंग व्यवस्था और कथित अवैध वसूली को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि आमरुतिया बाजार निवासी चंदन अग्रहरि और उसके भाई सागर अग्रहरि कुछ सहयोगियों के साथ मिलकर वाहनों से ‘एंट्री’ के नाम पर कथित रूप से रकम वसूलने का नेटवर्क चला रहे हैं।
दावा किया जा रहा है कि इस कथित नेटवर्क में ओवरलोड ट्रक, कंटेनर, डीसीएम, पिकअप, ट्रैक्टर-ट्रॉली और बाहरी बसों समेत विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक वाहनों को शामिल किया जाता था। सामने आए दस्तावेजों और डिजिटल लेन-देन के विवरण ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को गंभीर बना दिया है।
कथित ‘एंट्री’ के अलग-अलग रेट!
मामले से जुड़े आरोपों के अनुसार वाहनों की श्रेणी के हिसाब से कथित रूप से मासिक रकम तय थी—
बड़े वाहन/कंटेनर — ₹8,000 प्रतिमाह
डीसीएम/मध्यम वाहन — ₹6,000 प्रतिमाह
पिकअप/छोटे वाहन — ₹3,200 प्रतिमाह
हालांकि, इन दरों और वसूली की व्यवस्था की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
हाथ से लिखी सूची ने बढ़ाई जांच की जरूरत
मामले में सामने आई एक हस्तलिखित वाहन सूची को महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया जा रहा है। आरोप है कि सूची में दर्ज वाहनों को चेकिंग के दौरान ओवरलोडिंग की कार्रवाई से बचाने के लिए चिन्हित किया जाता था।
यदि जांच में सूची की लिखावट, तारीख, वाहन नंबर और उसके इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो यह कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली समझने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
₹24 हजार के ऑनलाइन ट्रांसफर ने खड़े किए सवाल
मामले में 7 जून को महराजगंज और गोरखपुर की कथित ‘एंट्री’ के नाम पर ₹24,000 के ऑनलाइन भुगतान का भी उल्लेख किया जा रहा है। दावा है कि यह रकम सागर अग्रहरि के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई और भुगतान से जुड़े विवरण में वाहनों के नंबर भी दर्ज थे।
बैंक रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयान की स्वतंत्र जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह भुगतान किस उद्देश्य से किया गया था।
ऑडियो रिकॉर्डिंग में कथित बातचीत
मामले से जुड़ी बताई जा रही ऑडियो रिकॉर्डिंग में वाहन पकड़े जाने के बाद आरटीओ से जुड़े लोगों से संपर्क किए जाने की बातचीत होने का दावा किया जा रहा है।
आरोप यह भी है कि कुछ मामलों में ओवरलोडिंग के बजाय वाहनों को किसी अन्य कागजी कमी के आधार पर कार्रवाई में दिखाने की कोशिश की जाती थी।
हालांकि, ऑडियो की आवाज, रिकॉर्डिंग की तारीख और उसमें मौजूद बातचीत की प्रामाणिकता की फॉरेंसिक जांच जरूरी है।
कार्यालय बंद होने के बाद रकम पहुंचाने का दावा
मामले से जुड़ी कुछ तस्वीरों को लेकर दावा किया जा रहा है कि कार्यालय बंद होने के बाद कथित वसूली की रकम और वाहनों की सूची अधिकारियों तक पहुंचाई जाती थी।
यदि इन तस्वीरों की तारीख, स्थान और परिस्थितियों की पुष्टि होती है तो यह जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू बन सकता है।
पुराने मामलों में नाम आने का भी दावा
रिपोर्ट के दौरान यह दावा भी सामने आया है कि चंदन अग्रहरि का नाम पूर्व में कुशीनगर में कथित वसूली से जुड़े मामले में सामने आया था। करीब तीन वर्ष पूर्व मथुरा प्रसाद (P.T.O.) और एक प्रवर्तन सिपाही के जेल जाने से जुड़े प्रकरण में भी उनके नाम की चर्चा होने का दावा किया जा रहा है।
इन पुराने मामलों में वास्तविक भूमिका और वर्तमान मामले से संबंध की पुष्टि के लिए आधिकारिक दस्तावेज और न्यायिक रिकॉर्ड देखना आवश्यक होगा।
सबसे बड़ा सवाल—कौन चला रहा था पूरा नेटवर्क?
अगर सामने आए दस्तावेज, ऑडियो रिकॉर्डिंग और बैंक ट्रेल जांच में सही पाए जाते हैं, तो कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं—
कथित वसूली की रकम किस-किस तक पहुंचती थी?
वाहनों की सूची किसके निर्देश पर तैयार होती थी?
क्या किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका थी?
कथित ‘एंट्री’ के बदले वाहनों को चेकिंग से बचाने की व्यवस्था कैसे होती थी?
और सबसे अहम—हर महीने होने वाली कथित वसूली का पूरा हिसाब कहां जाता था?
इन सवालों का जवाब केवल निष्पक्ष जांच और उपलब्ध डिजिटल एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के सत्यापन से ही सामने आ सकता है।
RNews7 की नजर जांच पर
मामले में लगाए गए आरोप गंभीर हैं। इसलिए परिवहन विभाग और जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि उपलब्ध दस्तावेजों, बैंक ट्रेल, ऑडियो रिकॉर्डिंग और संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो संबंधित पक्ष को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलना चाहिए।
RNews7 इस मामले में सामने आने वाले आधिकारिक दस्तावेज, जांच रिपोर्ट और संबंधित पक्षों का पक्ष भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।
रिपोर्ट — आर०के० त्रिपाठी
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एआरटीओ कार्यालय में कथित ‘एंट्री सिंडिकेट’ का खुलासा! हस्तलिखित वाहन सूची, ऑडियो रिकॉर्डिंग और ऑनलाइन पेमेंट ट्रेल ने उठाए गंभीर सवाल
