झूठे मुकदमों की आड़ में ‘वसूली’ का खेल, अब कानूनी शिकंजा होगा और भी सख्त

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता

​महिला अपराधों की गंभीरता को देखते हुए कानून में उन्हें विशेष सुरक्षा दी गई है, लेकिन हाल के दिनों में इन कानूनों के दुरुपयोग के मामले भी तेजी से सामने आए हैं। झूठा मुकदमा दर्ज कराकर ‘समझौते’ के नाम पर पैसा वसूलना (Extortion) अब एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह साबित हो जाता है कि मामला पैसे ऐंठने के इरादे से दर्ज कराया गया था, तो आरोपी महिला या संबंधित व्यक्ति को 7 साल जेल की हवा खानी पड़ सकती है।

​वसूली का नया पैंतरा: एफीडेविट से मुकरना भी अब अपराध

​हाल के रुझानों में एक खतरनाक चलन देखा गया है जहाँ शिकायतकर्ता पहले एफीडेविट (शपथ पत्र) के जरिए सुलह-समझौता कर पैसा वसूलता है, और फिर अधिक पैसों की मांग पूरी न होने पर पुराने समझौते से मुकर जाता है।

​कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार:

  • न्यायालय की अवमानना और धोखाधड़ी: एक बार आधिकारिक तौर पर सुलह करने के बाद मुकरना न केवल अदालत को गुमराह करना है, बल्कि यह IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 193 (झूठे साक्ष्य) के तहत आता है।
  • निरंतर जबरन वसूली: बार-बार पैसे की मांग करना और पुराने सुलह को नजरअंदाज करना अपराधी की ‘आपराधिक प्रवृत्ति’ को दर्शाता है, जिससे जमानत मिलना भी मुश्किल हो सकता है।

​कानूनी धाराओं का जाल: IPC के तहत सख्त प्रावधान

​भारतीय दंड संहिता (IPC) में ऐसे जालसाजों के खिलाफ कई महत्वपूर्ण धाराएं मौजूद हैं:

  • जबरन वसूली (धारा 384/385): यदि कोई महिला किसी पुरुष को छेड़छाड़ ,बलात्कार या दहेज जैसे झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर संपत्ति या पैसों की मांग करती है, तो उस पर इन धाराओं के तहत कार्रवाई होती है।
  • गंभीर आरोपों का डर दिखाकर वसूली (धारा 388/389): यह सबसे घातक धारा मानी जाती है। इसमें झूठा बलात्कार (376), अप्राकृतिक यौन संबंध (377) या अन्य जघन्य अपराधों की धमकी देकर पैसे मांगना शामिल है।
  • झूठी शिकायत और लोक सेवक को गुमराह करना (धारा 211 और 182): जानबूझकर झूठी पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराना और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करना कानूनन जुर्म है।
  • साक्ष्य गढ़ना और धोखाधड़ी (धारा 193/195 और 420): झूठे केस को सच साबित करने के लिए नकली सबूत पेश करना और अनुचित लाभ के लिए धोखाधड़ी करना भारी पड़ सकता है।
  • आपराधिक साजिश (धारा 120B): यदि इस पूरे खेल में महिला के साथ अन्य लोग भी शामिल हैं, तो उन पर साजिश रचने का मुकदमा चलता है।

​भारतीय न्याय संहिता (BNS): नए भारत का नया और सख्त कानून

​देश में लागू हुई नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) ने इन अपराधों पर लगाम लगाने के लिए और भी कड़े प्रावधान किए हैं:

  1. 7 साल तक की सजा: नए कानून के अनुसार, किसी निर्दोष व्यक्ति को झूठे मामले में फंसाने की साजिश रचने पर अब 7 साल तक के कारावास का प्रावधान है।
  2. झूठे सबूतों पर प्रहार: यदि कोई व्यक्ति कोर्ट या पुलिस के सामने झूठे साक्ष्य गढ़ता है, तो उसे भी 7 साल तक की कठोर सजा दी जा सकती है।

साथ ही ये धाराएं गैर जमानती श्रेणी की है

​निष्कर्ष: कानून सुरक्षा के लिए है, शोषण के लिए नहीं

​न्यायालयों ने कई बार अपने फैसलों में कहा है कि महिला सुरक्षा कानूनों का इस्तेमाल ‘हथियार’ के रूप में नहीं बल्कि ‘ढाल’ के रूप में किया जाना चाहिए। झूठे मुकदमों और सुलह के बाद मुकरने जैसी हरकतों से न केवल एक निर्दोष का जीवन बर्बाद होता है, बल्कि असली पीड़ितों को मिलने वाले न्याय में भी देरी होती है। पुलिस अब सुलह के एफीडेविट को भी साक्ष्य के तौर पर देख रही है ताकि ब्लैकमेलिंग के चक्र को तोड़ा जा सके।

ब्यूरो रिपोर्ट, ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *