कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश: अभियुक्तों ने शपथ पत्र पर हाईकोर्ट के आदेश का आधा सच बताकर माँगी राहत, खुलासे से मचा हड़कंप

हराजगंज (क्राइम डेस्क): कोठीभार क्षेत्र के चर्चित मारपीट और घर में घुसकर हमला करने के मामले में नया मोड़ आ गया है। मुकदमे के अभियुक्तों पर आरोप लगा है कि उन्होंने माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की गलत व्याख्या कर और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर निचली अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया है।

​क्या है नया विवाद?

​मुकदमे के एक अभियुक्त छोटेलाल पुत्र मुन्नी निवासी कटहरी खुर्द थाना कोठीभार द्वारा विचारण न्यायालय (Trial Court) के समक्ष दाखिल किए गए शपथ पत्र ने इस पूरे कानूनी ड्रामे का पर्दाफाश कर दिया है। शपथ पत्र में सनसनीखेज आरोप लगाया गया है कि अभियुक्तों ने न्यायालय को यह तो बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ जारी सम्मन आदेश (Summoning Order) को रद्द कर दिया है, लेकिन उन्होंने इस तथ्य को “शातिर तरीके” से दबा लिया कि हाईकोर्ट ने इसी आदेश में मजिस्ट्रेट को नए सिरे से, साक्ष्यों की विवेचना करते हुए पुनः सख्त आदेश पारित करने का स्पष्ट निर्देश दिया है।

​शिकायतकर्ता का पक्ष: न्याय में बाधा डालने का आरोप

​शिकायतकर्ता मनोज पांडेय और कानूनी जानकारों का मानना है कि अभियुक्तों द्वारा हाईकोर्ट के आदेश का केवल एक हिस्सा (निरस्तीकरण) पेश करना और दूसरे हिस्से (पुनः आदेश का निर्देश) को छिपाना न्याय की प्रक्रिया में बाधा डालना है।

​शपथ पत्र के अनुसार:

  1. ​अभियुक्तों ने यह दिखाने की कोशिश की कि वे मुकदमे से पूरी तरह बरी हो गए हैं।
  2. ​वास्तविकता यह है कि हाईकोर्ट ने केवल पिछले सम्मन आदेश की ‘तकनीकी कमी’ (विस्तृत चर्चा न होना) के कारण उसे रद्द किया था, न कि केस को खत्म किया था।
  3. ​उच्च न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया है कि सिविल जज (J.D.)/न्यायिक मजिस्ट्रेट, महराजगंज, इस मामले में साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर गौर करते हुए नया आदेश पारित करें।

​कानूनी विशेषज्ञों की राय

​विद्वान वकीलों का कहना है कि शपथ पत्र के माध्यम से तथ्यों को छिपाने (Suppression of Facts) का यह कृत्य गंभीर है। यदि कोई पक्ष जानबूझकर उच्च न्यायालय के निर्देशों को आधा-अधूरा पेश करता है, तो इसे ‘न्यायालय की अवमानना’ या ‘अदालत के साथ धोखाधड़ी’ के रूप में देखा जा सकता है।

​मामले की पृष्ठभूमि

​यह पूरा विवाद कोठीभार थाने में परिवाद संख्या 7248/2021 से शुरू हुआ था, जिसमें संतोष वर्मा,नीतीश वर्मा,छोटेलाल निवासी कटहरी खुर्द थाना कोठीभार सहित 6 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 504 और 452 (घर में घुसकर मारपीट) के गंभीर आरोप हैं। जहाँ एक तरफ हाईकोर्ट ने सम्मन आदेश को त्रुटिपूर्ण मानकर वापस मजिस्ट्रेट के पास भेजा है, वहीं अभियुक्तों द्वारा इस प्रक्रिया को अपनी “जीत” के रूप में पेश करने की कोशिश अब उनके गले की फांस बन सकती है।

​अब सबकी नजरें महराजगंज की अदालत पर टिकी हैं, जहाँ छोटेलाल के शपथ पत्र के बाद मजिस्ट्रेट हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप क्या नया फैसला सुनाते हैं।

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