बड़ी खबर: महिला आयोग की उपाध्यक्ष का महराजगंज दौरा, पीड़ित महिलाओं की सुनी गुहार, पुलिस को दिए कड़े निर्देश

महराजगंज | ब्यूरो रिपोर्ट

​उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी ने बुधवार को महराजगंज के विकास भवन सभागार में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल जनसुनवाई में महिलाओं के प्रति अपराध और प्रशासनिक सुस्ती पर कड़ा रुख अख्तियार किया। ‘मिशन शक्ति’ और महिला सशक्तिकरण के संकल्प को दोहराते हुए, उपाध्यक्ष ने न केवल 40 से अधिक मामलों की सुनवाई की, बल्कि लापरवाह अधिकारियों को मौके पर ही फटकार भी लगाई।

घरेलू हिंसा के मामलों की भरमार, पुलिस को ‘एक्शन’ मोड में आने के निर्देश

​जनसुनवाई के दौरान पहुंचे कुल 40 प्रकरणों में से अधिकांश घरेलू हिंसा और उत्पीड़न से जुड़े थे। उपाध्यक्ष चारू चौधरी ने पुलिस विभाग को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि महिलाओं से जुड़ी शिकायतों में किसी भी तरह की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी को निर्देश दिए कि वे विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर पीड़ित महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ तत्काल सुनिश्चित करें।

दो मामलों में ‘स्पॉट डिसीजन’: आरोपी सीधा हवालात के पीछे

​जनसुनवाई के दौरान दो संवेदनशील मामलों ने सबका ध्यान खींचा, जहाँ उपाध्यक्ष का ‘रौद्र रूप’ देखने को मिला:

  1. कोतवाली महराजगंज मामला: ग्राम नटवा जंगल की निवासी तैबू निशा ने अपने पति अबू हुरैश पर मारपीट और तीन शादियों का आरोप लगाया। उपाध्यक्ष के निर्देश पर आरोपी को तत्काल हिरासत में ले लिया गया।
  2. कोठीभार थाना मामला (विपक्षी का दावा और विवाद): प्रियंका वर्मा (निवासी कटहरी खुर्द) ने पटीदारों पर घर में घुसकर हमला करने और माता का गला घोंटने के प्रयास का आरोप लगाया। इस मामले में उपाध्यक्ष ने पुलिस को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।

बड़ा खुलासा: शिकायतकर्ता परिवार का खुद का लंबा ‘अपराधिक इतिहास’

​कोठीभार मामले में जनसुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब विपक्षी पक्ष ने संतोष वर्मा और उसके पूरे परिवार (पत्नी नगीना देवी, पुत्र नीतीश, प्रियंका,छोटेलाल आदि) के अपराधिक इतिहास (Criminal History) के पुख्ता दस्तावेज पेश किए।

दस्तावेजों के अनुसार परिवार का काला चिट्ठा:

  • मुकदमों की बौछार: संतोष वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों के विरुद्ध वर्ष 2016 से लेकर 2025 तक विभिन्न थानों और न्यायालयों में 24 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं।
  • गंभीर धाराएं: इन मुकदमों में केवल मारपीट ही नहीं, बल्कि धारा 3/4 उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम (गुंडा एक्ट), SC/ST एक्ट, खाद्य सुरक्षा अधिनियम और BNS की गंभीर धाराएं शामिल हैं।
  • क्षेत्र में रसूख और रंजिश: दस्तावेजों से स्पष्ट है कि यह परिवार कोठीभार क्षेत्र के दर्जनों लोगों और अपने सगे पटीदारों के खिलाफ रंजिशवश मुकदमे दर्ज कराने और खुद भी अपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने का इतिहास रखता है।

विवादों के घेरे में 76 का आरोप

​विपक्षी पक्ष ने साक्ष्यों के साथ सवाल उठाया कि नगीना देवी द्वारा हाल ही में अपने ही 10 पटीदारों (जिसमें सगे भाई-भाई, बाप-बेटे और चाचा-भतीजे शामिल हैं) पर धारा 76 और 307 के तहत जो मुकदमा दर्ज कराया गया है, वह प्रथम दृष्टया संदिग्ध और कानून का दुरुपयोग प्रतीत होता है।

​विपक्ष का आरोप है कि यह परिवार “संगठित गिरोह” की तरह काम करता है, जो पहले खुद अपराधिक गतिविधियों (जैसे गुंडा एक्ट,SC/ST एक्ट के मामले) में लिप्त रहता है और फिर बचाव के लिए महिलाओं का सहारा लेकर गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज कराता है।

प्रशासनिक सतर्कता की अपील

​मीडिया से बातचीत में उपाध्यक्ष चारू चौधरी ने कहा, “हम पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन प्रशासन को यह भी देखना होगा कि अपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग कानून का ढाल बनाकर निर्दोषों को न फंसाएं। जिन मामलों में ‘गुंडा एक्ट’ या ‘SC/ST एक्ट’ जैसे मुकदमे शिकायतकर्ता परिवार पर खुद दर्ज हैं, वहां पुलिस को अधिक सतर्कता से जांच करनी चाहिए।”

न्यूज डेस्क, महराजगंज

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