मशहूर डांसर और स्टेज परफॉर्मर सपना चौधरी के लिए कानूनी मोर्चे पर एक अच्छी खबर आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें सपना चौधरी के पासपोर्ट रिन्यूअल के लिए ‘अनापत्ति प्रमाणपत्र’ (NOC) देने से इनकार कर दिया गया था।
हाईकोर्ट का कड़ा रुख: “आजादी राज्य का कोई तोहफा नहीं”
जस्टिस पंकज भाटिया की एकल पीठ ने सपना चौधरी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि व्यक्ति की स्वतंत्रता राज्य द्वारा दिया गया कोई उपहार नहीं है, बल्कि यह राज्य का प्राथमिक कर्तव्य है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सपना चौधरी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले के जमानत आदेश (Bail Order) में विदेश यात्रा पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई थी। ऐसे में केवल दस्तावेजों की कमी का हवाला देकर NOC देने से मना करना अनुचित है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2018 का है, जब सपना चौधरी के खिलाफ लखनऊ में एक शो रद्द करने के बाद धोखाधड़ी (IPC धारा 420 और 406) का मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में सपना फिलहाल जमानत पर हैं।
निचली अदालत की आपत्ति:
पिछले साल जून में ट्रायल कोर्ट ने सपना चौधरी की NOC अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उन्होंने यात्रा की सटीक अवधि और गंतव्य (देश) की जानकारी साझा नहीं की है।
बचाव पक्ष की दलीलें
सपना चौधरी के वकील ने हाईकोर्ट में दलील दी कि:
- पासपोर्ट न होना न केवल उनके मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है, बल्कि उनकी आजीविका कमाने के अधिकार में भी बाधा है।
- सपना के दो बच्चे हैं और भारत में उनकी पर्याप्त संपत्ति है, इसलिए उनके देश छोड़कर भागने की कोई संभावना नहीं है।
- वैश्विक स्तर पर कार्यक्रमों के लिए आयोजक अक्सर आखिरी वक्त पर वैध पासपोर्ट की मांग करते हैं, ऐसे में यात्रा का विवरण पहले से देना हर बार संभव नहीं होता।
कोर्ट का फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह सपना चौधरी के पासपोर्ट रिन्यूअल के लिए तत्काल NOC जारी करे। कोर्ट ने माना कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि सपना न्याय की प्रक्रिया से भाग सकती हैं।
इस फैसले के बाद अब हरियाणा की ‘देसी क्वीन’ के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने शो करने का रास्ता साफ हो गया है।
