इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अवैध तोड़फोड़ और राजस्व रिकॉर्ड में धांधली पर  पर ₹20 लाख का भारी जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह फैसला एक याचिकाकर्ता की संपत्ति को बिना किसी पूर्व सूचना के गिराने और राजस्व रिकॉर्ड  में एकतरफा बदलाव करने के मामले में सुनाया गया है।

​क्या है पूरा मामला?

​मामला रायबरेली जिले से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने वर्ष 2021 में कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन खरीदी थी, जिसका नाम राजस्व रिकॉर्ड में भी दर्ज था। हालांकि, प्रतिवादी अधिकारियों ने 24 मार्च 2025 को बिना किसी नोटिस या पूर्व सूचना के याचिकाकर्ता के मकान को जमींदोज कर दिया। कोर्ट को बताया गया कि अधिकारियों ने याचिकाकर्ता को सुनवाई का मौका दिए बिना ही यूपी रेवेन्यू कोड की धारा 38(5) के तहत एकतरफा आदेश पारित कर दिया था।

​कोर्ट की तीखी टिप्पणी

​मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आलोक माथुर ने कहा कि केवल अवैध आदेश को रद्द करना उस नागरिक के साथ न्याय नहीं होगा जिसकी संपत्ति को राज्य के अधिकारियों ने मनमाने ढंग से नष्ट कर दिया है। कोर्ट ने टिप्पणी की:

“राज्य के अधिकारियों का आचरण और एक नागरिक को हुआ नुकसान इतना गंभीर है कि इसके लिए उचित हर्जाना लगाया जाना अनिवार्य है।”

 

​फैसले की मुख्य बातें:

  1. हर्जाना: कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को 20 लाख रुपये का हर्जाना अदा करे।
  2. दोषी अधिकारियों से वसूली: हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह इस मामले की जांच कराए और यह पता लगाए कि इस अवैध तोड़फोड़ के लिए कौन से अधिकारी जिम्मेदार थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जुर्माने की यह राशि दोषी अधिकारियों की जेब से वसूली जानी चाहिए।
  3. सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन: कोर्ट ने पाया कि तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित गाइडलाइंस (बुलडोजर कार्रवाई पर हालिया निर्देश) का पूरी तरह उल्लंघन किया गया।
  4. कब्जा वापस देने का निर्देश: अदालत ने विवादित संपत्ति का कब्जा तुरंत याचिकाकर्ता को सौंपने का भी आदेश दिया है।

​निष्कर्ष

​हाईकोर्ट के इस सख्त रुख ने उन अधिकारियों के लिए चेतावनी जारी की है जो बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए ‘बुलडोजर’ कार्रवाई या राजस्व रिकॉर्ड में छेड़छाड़ करते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि ‘कानून के शासन’ का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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