महराजगंज। जनपद के थाना घुघली के अंतर्गत दर्ज एक छेड़खानी और मारपीट के मामले (मु.अ.सं. 77/2025) ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। जहाँ एक ओर अदालत ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट (FR) को निरस्त कर अग्रिम विवेचना के आदेश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर आरोपी पक्ष ने वादी पक्ष पर ‘न्यायालय को गुमराह करने’ और ‘अवैध वसूली’ के गंभीर आरोप लगाते हुए कानूनी मोर्चा खोल दिया है।
दस्तावेजों में बड़ा विरोधाभास: घटना को पहले बताया था ‘झूठा’
प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, इस मामले में तब बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब वादी गौरव वर्मा और उनकी पत्नी ममता वर्मा के दो पृथक नोटरी शपथपत्र सामने आए। इन शपथपत्रों में, जो पूर्व में क्षेत्राधिकारी (सदर) को दिए गए थे, दोनों ने स्वीकार किया था कि:
- दिनांक 21 फरवरी 2025 की रात को केवल साइड देने को लेकर मामूली विवाद हुआ था।
- पीड़िता (ममता वर्मा) के साथ कोई छेड़खानी, मारपीट या गाली-गलौज नहीं हुई थी।
- उन्होंने ‘स्थानीय लोगों के बहकावे में आकर’ यह मुकदमा दर्ज कराया था।
3 लाख की वसूली और फिर से रंगदारी का आरोप
आरोपी रिंकू वर्मा ने अब माननीय न्यायालय (सिविल जज जूनियर डिवीजन/न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट नं. 3) के समक्ष धारा 173(4) BNSS/156(3) CrPC के तहत एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। रिंकू वर्मा का आरोप है कि:
- सुलह के नाम पर लेन-देन: वादी पक्ष ने पूर्व में सुलह करने के नाम पर आरोपियों से कथित तौर पर ₹3,00,000/- (तीन लाख रुपये) प्राप्त किए थे।
- नई मांग और दबाव: आरोप है कि अब वादी पक्ष द्वारा पुनः सोने की चेन और ₹3,00,000/- की अतिरिक्त मांग की जा रही है। मांग पूरी न होने पर ही वादी अपने पुराने शपथपत्रों से मुकर गया और कोर्ट में प्रोटेस्ट दाखिल कर दोबारा जांच का आदेश हासिल कर लिया।
- अपराधिक षड्यंत्र: रिंकू वर्मा का दावा है कि विपक्षीगण शातिर प्रवृत्ति के हैं और उनके विरुद्ध पूर्व में भी कई मामले दर्ज हैं।
शपथ पत्र देकर मुकरने और वसूली का खेल
मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि वादी गौरव वर्मा और उसकी पत्नी ममता वर्मा ने पहले क्षेत्राधिकारी (CO) सदर के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर नोटरी शपथ पत्र दिया था। उस समय उन्होंने स्वीकार किया था कि:
- ”घटना के समय कोई छेड़खानी या मारपीट नहीं हुई थी।”
- ”मुकदमा केवल साइड देने के विवाद में गलतफहमी के कारण लिखवाया गया था।”
- दोनों पक्ष आपस में सगे पटीदार और रिश्तेदार हैं।
कोर्ट में ‘साजिश’ बनाम ‘न्याय’ की लड़ाई
रिंकू वर्मा ने अपनी अर्जी में BNS की धाराओं 228, 229, 230,176,308(2),318(2),356(1),356(2),61(2) BNS/192,193,194,211,386,420,499,500,120(B) IPC) (धोखाधड़ी, झूठे साक्ष्य गढ़ना, जबरन वसूली और आपराधिक साजिश) के तहत वादी गौरव वर्मा, ममता वर्मा और बैजनाथ वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने तर्क दिया है कि वादी पक्ष ने अदालत से तथ्यों को छिपाकर और झूठे आधारों पर दोबारा जांच का आदेश प्राप्त किया है, जो न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

भू-माफिया सिंडिकेट और सरकारी जुर्माने का खुलासा
न्यायालय में दाखिल धारा 175(3) BNSS के प्रार्थना पत्र के अनुसार, रिंकू वर्मा ने दावा किया है कि विपक्षी बैजनाथ वर्मा और गौरव वर्मा शातिर अपराधी और भू-माफिया हैं। दस्तावेजों के मुताबिक:
- अवैध कब्जे पर भारी जुर्माना: विपक्षी संख्या 1 (गौरव) और 3 (बैजनाथ) के विरुद्ध थाना कोठिभार में लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम (मु०अ०सं० 168/2019) के तहत मामला दर्ज है।
- बेदखली का आदेश: राजस्व विभाग द्वारा इन पर सरकारी जमीन से बेदखली और ₹5,50,000/- (साढ़े पांच लाख रुपये) के जुर्माने का आदेश पहले ही हो चुका है।
- साजिश का कारण: रिंकू वर्मा का आरोप है कि उनके मित्र द्वारा इन भू-माफियाओं के अवैध कब्जों के खिलाफ कानूनी पैरवी की जा रही है, जिससे क्षुब्ध होकर इन्होंने झूठा छेड़खानी का केस रचा है।
विधिक विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि वादी पक्ष ने पहले आधिकारिक रूप से शपथपत्र देकर घटना को नकारा था, तो कोर्ट में प्रोटेस्ट दाखिल करना ‘परजुरी’ (Perjury) यानी अदालत में झूठ बोलने की श्रेणी में आ सकता है। अब पुलिस की अग्रिम विवेचना में इन शपथपत्रों और वसूली के आरोपों की सत्यता इस केस का भविष्य तय करेगी।
