महराजगंज/गोरखपुर: महराजगंज के श्यामदेउरवा में मंगलवार सुबह हुए भीषण पुलिस वाहन हादसे में कई नए तथ्य सामने आए हैं। इस दुर्घटना ने न केवल एक जांबाज पुलिसकर्मी को छीना है, बल्कि विभाग में सुरक्षा मानकों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहली तैनाती और आखिरी सफर
हादसे में जान गंवाने वाले सब इंस्पेक्टर संतोष कुमार बिहार के सिवान जिले के सहसरावं गांव के निवासी थे। वे 2023 बैच के दरोगा थे और गोरखपुर का रामगढ़ताल थाना उनकी पहली तैनाती थी। सोमवार रात वह पूरी ऊर्जा के साथ जालसाजी के एक आरोपी की तलाश में दबिश देने महराजगंज के सिंदुरिया थाना क्षेत्र के भेड़ियारी गांव गए थे, लेकिन किसे पता था कि यह उनका आखिरी ऑपरेशन साबित होगा।
घायलों की स्थिति
हादसे में घायल हुए अन्य पुलिसकर्मियों का गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है:
- एसएसआई रमेश चंद्र कुशवाहा: इनकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।
- महिला दरोगा गीता: इन्हें गंभीर चोटें आई हैं और डॉक्टरों की विशेष टीम इनकी निगरानी कर रही है।
- चालक व अन्य: वाहन चालक खतरे से बाहर है। बताया जा रहा है कि टीम में कुल 5 से 6 लोग सवार थे।

हादसे के पीछे ‘झपकी’ और ‘कोहरा’
नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, दुर्घटना सुबह लगभग 5:30 से 6:00 बजे के बीच हुई। जांच में दो मुख्य कारण सामने आ रहे हैं:
- चालक को झपकी: रात भर की दबिश और थकान के कारण कतरारी चौकी के पास चालक को नींद की झपकी आ गई, जिससे तेज रफ्तार स्कॉर्पियो सीधे पेड़ से जा टकराई।
- धुंध और कोहरा: सुबह के समय हाईवे पर हल्का कोहरा और विजिबिलिटी कम होने को भी हादसे का एक सहायक कारण माना जा रहा है।
पुलिस महकमे में शोक
हादसे की खबर मिलते ही गोरखपुर और महराजगंज के आला अधिकारी अस्पताल पहुंचे। दरोगा संतोष कुमार के परिवार को सूचना दे दी गई है, जिसके बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक दरोगा के पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन लाया जाएगा, जहां उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।
