महाराजगंज: उत्तर प्रदेश में शादी-ब्याह और सार्वजनिक समारोहों में बजने वाले अनियंत्रित DJ और लाउडस्पीकर अब पुलिस की रडार पर हैं। ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते कहर और माननीय न्यायालयों के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाए जाने के विरोध में राजधानी लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण शिकायत दर्ज कराई गई है।
अधिवक्ता विनय कुमार पांडे ने उठाया बड़ा कदम
महाराजगंज के प्रमुख अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता विनय कुमार पांडे ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर ध्वनि प्रदूषण अधिनियम के उल्लंघन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बारात और समारोहों के दौरान निर्धारित मानकों से कहीं अधिक तेज आवाज में DJ बजाया जा रहा है, जो ‘ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियमावली, 2000’ का खुला उल्लंघन है।
बीमार और विद्यार्थियों के लिए आफत बना शोर
शिकायती पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि देर रात तक चलने वाले इस शोर-शराबे से न केवल आम नागरिक, बल्कि हृदय रोगी, वृद्धजन और परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। नींद में खलल और मानसिक तनाव के कारण जनता में भारी रोष है।
पत्रकारिता के नजरिए से प्रमुख मांगें:
अधिवक्ता विनय कुमार पांडे ने पुलिस प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित पांच प्रमुख मांगें रखी हैं:
- डेसिबल मीटर की उपलब्धता: प्रदेश के हर थाने में ध्वनि मापने वाले यंत्र (डेसिबल मीटर) मुहैया कराए जाएं।
- समय सीमा का पालन: रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर और DJ पर पूरी तरह कड़ाई बरती जाए।
- ऑन-स्पॉट चालान: नियमों का उल्लंघन करने वालों पर मौके पर ही दंडात्मक कार्रवाई और भारी जुर्माना लगाया जाए।
- पुलिस को स्पष्ट निर्देश: जमीनी स्तर पर तैनात पुलिसकर्मियों को न्यायालय के आदेशों के अनुपालन हेतु विशेष ट्रेनिंग और निर्देश दिए जाएं।
- जन-जागरूकता: जनता को तेज ध्वनि के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाए।
न्यायालय के आदेशों की अनदेखी पर सवाल
पत्र में इस बात का भी उल्लेख है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा ध्वनि प्रदूषण पर सख्त रोक लगाने के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई का अभाव दिख रहा है। अब देखना यह है कि पुलिस मुख्यालय इस जनहित याचिका नुमा शिकायत पर क्या कड़ा रुख अपनाता है।
