RTI से बड़ा खुलासा: 17 मुकदमों के आरोपी ने फर्जीवाड़े से हथियाया अधिवक्ता का चोला,बार काउंसिल भेजा जायेगा साक्ष्य

महाराजगंज | विशेष संवाददाता

​न्याय के मंदिर में ईमानदारी की शपथ लेने वाले पेशे पर एक बार फिर दाग लगा है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत हुए एक सनसनीखेज खुलासे ने महाराजगंज के सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन में हड़कंप मचा दिया है। कोठीभार थाना क्षेत्र के नीतीश वर्मा नामक एक युवक पर आरोप है कि उसने अपने खौफनाक आपराधिक इतिहास और शैक्षिक फर्जीवाड़े को जानबूझकर छिपाया और जालसाजी कर अधिवक्ता (वकील) का पंजीकरण हासिल कर लिया।

RTI और शपथ पत्र ने खोली ‘झूठ’ की पोल

​हाल ही में RTI और संबंधित दस्तावेजों (घोषणा-पत्र, दिनांक 02/09/2019) के जरिए यह तथ्य सामने आया है कि नीतीश वर्मा ने राजकीय आईटीआई (ITI) निचलौल में प्रवेश के समय एक लिखित शपथ पत्र दिया था। इस शपथ पत्र के अनुसार, उसने यह दावा किया था कि वह किसी अन्य संस्थान में ‘नियमित छात्र’ नहीं है।जबकि इस दौरान स्नातक का भी नियमित छात्र रहा है

जांच में हुआ बड़ा खुलासा:

शिकायतकर्ता रिंकू वर्मा द्वारा RTI के माध्यम से जुटाए गए साक्ष्यों के अनुसार, आरोपी ने एक ही सत्र के दौरान ITI और ग्रेजुएशन जैसी दो नियमित डिग्रियां हासिल कीं। शपथ पत्र के बिंदु संख्या 08 में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि ऐसी जालसाजी पाए जाने पर IPC की धारा 420/467 के तहत मुकदमा दर्ज होगा। आज यही दस्तावेज़ आरोपी के खिलाफ सबसे बड़ा साक्ष्य बनकर सामने आया है।

17 मुकदमे और संगठित आपराधिक कुनबा

​RTI से प्राप्त जानकारी के अनुसार नीतीश वर्मा का प्रोफाइल किसी कानूनवेत्ता का नहीं, बल्कि एक पेशेवर अपराधी जैसा है। आरोपी और उसके परिवार का रिकॉर्ड चौंकाने वाला है:

  • नीतीश वर्मा: लूट, बलवा, दलित उत्पीड़न (SC/ST Act) और महिला उत्पीड़न जैसे 17 गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।
  • संतोष वर्मा (पिता): इन पर गुंडा एक्ट और SC/ST एक्ट समेत 23 मुकदमे दर्ज होने की पुष्टि हुई है।
  • छोटेलाल (नाना): इनके खिलाफ भी 16 मुकदमे दर्ज हैं।

​शिकायत के मुताबिक, यह पूरा परिवार एक ‘संगठित गिरोह’ की तरह काम कर आर्थिक शोषण और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त है।

प्रस्तावित कार्रवाई:

शिकायतकर्ता ने कहा है कि आरोपी के पंजीकरण को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने हेतु स्टेट बार काउंसिल उत्तर प्रदेश (प्रयागराज) को औपचारिक पत्र और साक्ष्य भेजे जाएंगे।

सिस्टम पर सवाल?

​इस मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कैसे 17 मुकदमों का आरोपी पुलिस वेरिफिकेशन और बार काउंसिल की स्क्रूटनी को चकमा देकर लाइसेंस पाने में कामयाब रहा? फिलहाल, RTI से हुए इस खुलासे ने आरोपी के कानूनी करियर पर पूर्ण विराम लगा दिया है।

ब्यूरो रिपोर्ट, महाराजगंज।

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