अपराधियों को ‘माननीयों’ का कवच? 40 मुकदमों वाले पिता-पुत्र को विधायक व जिला पंचायत अध्यक्ष ने दिया ‘उत्तम चरित्र’ का प्रमाण पत्र

गवाही रोकने का ‘खूनी खेल’: 15 दिन पहले कोर्ट में हुई थी गवाही, रंजिश में हिस्ट्रीशीटर ने चाचा-चाची पर दर्ज कराई ‘फर्जी’ FIR

महराजगंज (कोठीभार)।

जनपद के थाना कोठीभार अंतर्गत ग्राम कटहरी खुर्द में कानून और रसूख के गठजोड़ का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने न्याय व्यवस्था और स्थानीय राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ 23 मुकदमों के आरोपी और ‘गुंडा एक्ट’ का सामना कर रहे एक शातिर अपराधी को बचाने के लिए जिले के दो रसूखदार जनप्रतिनिधियों द्वारा ‘उत्तम चरित्र’ का प्रमाण पत्र देने का मामला प्रकाश में आया है।

​गवाही के 15 दिन बाद ‘फर्जी’ मुकदमा: दबाव की रणनीति

​ताजा विवाद का कारण 01 फरवरी 2026 को दर्ज हुई एक FIR (No. 0035) है। पीड़ित शैलेश उर्फ डिंकू वर्मा ने बताया कि उनकी पत्नी सरिता ने 17 जनवरी 2026 को मुकदमा संख्या 1877/2017 (धारा 452, 506 आदि) में मुख्य अभियुक्त संतोष वर्मा और नीतीश वर्मा के खिलाफ माननीय न्यायालय के समक्ष 244 CrPC के तहत अपनी गवाही दर्ज कराई थी।

​आरोप है कि इसी गवाही से बौखलाकर और मामले में अनुचित दबाव बनाने के लिए अभियुक्त नीतीश वर्मा (17 मुकदमे) ने ठीक 15 दिन बाद शैलेश और उनकी पत्नी पर BNS 352 व 351(3) के तहत फर्जी केस दर्ज करा दिया ताकि मुख्य मुकदमे में समझौता करने का दबाव बनाया जा सके।

​’माननीयों’ की भूमिका पर गंभीर सवाल

​दस्तावेजों के अनुसार, कुख्यात अपराधी संतोष वर्मा, जिस पर 23 संगीन मुकदमे दर्ज हैं और जिसके विरुद्ध गुंडा एक्ट की कार्यवाही विचाराधीन है, उसे बचाने के लिए दो जनप्रतिनिधियों ने प्रमाण पत्र जारी किए हैं:

  1. जयमंगल कन्नौजिया (सदर विधायक): संतोष वर्मा सिसवा क्षेत्र का निवासी है, फिर भी विधायक ने उसे ‘उत्तम चरित्र’ का सर्टिफिकेट दिया।
  2. रविकांत पटेल (जिला पंचायत अध्यक्ष): इन्होंने भी अपराधी का आचरण ‘उत्तम’ बताया है। ये दोनों प्रमाण पत्र वर्तमान में संतोष वर्मा के विरुद्ध चल रहे गुंडा एक्ट की पत्रावली में आरोपी के बचाव के लिए संलग्न किए गए हैं।

​मुकदमों की श्रृंखला: हाईकोर्ट से मिल चुका है तमाचा

​शैलेश वर्मा ने बताया कि उन्हें प्रताड़ित करने के लिए पूर्व में भी संतोष वर्मा ने 3 केस दर्ज कराए थे, जिनकी स्थिति इस प्रकार है:

  • NCR No. 58/2022: इस मामले को माननीय उच्च न्यायालय ने ‘फर्जी’ मानकर निरस्त (Quash) कर दिया है।
  • NCR No. 31/2016: इस मामले में वर्तमान में कार्यवाही स्थगन (Stay) हेतु प्रक्रिया लंबित है।
  • मु.सं. nil/2017 (110G CrPC): यह मामला पूर्व में ही निस्तारित/समाप्त हो चुका है।

​अपराधियों का ‘सिंडिकेट’

​दस्तावेजों के अनुसार, संतोष वर्मा (23 मुकदमे) और उनके पुत्र नीतीश वर्मा (17 मुकदमे) के खिलाफ दर्जनों केस दर्ज हैं। नीतीश पर फर्जी डिग्री के सहारे वकालत पंजीकरण कराने का भी आरोप है। सांसद प्रतिनिधि हरिराम यादव ने कहा है कि किसी अपराधी को मदद नहीं दी जाती, लेकिन विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रमाण पत्र कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

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