महाराजगंज जनपद के कोठीभार थाने में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 29/20 में न्यायालय ने स्वीकार किए पर्याप्त आधार। निगरानी याचिका लंबित होने के बावजूद विचारण न्यायालय ने आरोप तय करने हेतु दिया था ‘अंतिम अवसर’।
न्यायिक घटनाक्रम:
स्थानीय न्यायालय ने आज एक महत्वपूर्ण कानूनी कार्यवाही में मनोज पाण्डेय द्वारा दर्ज कराई गई FIR (मुकदमा अपराध संख्या 29/20) के आधार पर सभी पांच अभियुक्तों के विरुद्ध औपचारिक रूप से आरोप तय (Charge Frame) कर दिए हैं।
इस मामले में कानूनी दांव-पेंच उस समय और दिलचस्प हो गए जब दिनांक 23.08.2025 को अभियुक्तों का डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र निरस्त होने के बाद, उन्होंने सेशन न्यायालय में ‘आपराधिक निगरानी’ (Criminal Revision) दायर की थी। हालांकि यह निगरानी याचिका लंबित थी, परंतु विचारण न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्यवाही को आगे बढ़ाया।
न्यायालय का कड़ा रुख और अंतिम अवसर:
बीती 04 फरवरी, 2026 को न्यायालय ने अभियुक्तों को केवल 2 दिनों की अग्रिम तारीख देते हुए सख्त निर्देश जारी किए थे। न्यायालय ने आज यानी 06 फरवरी, 2026 को आरोप विरचन (Charge Framing) की प्रक्रिया हेतु सभी अभियुक्तों को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का ‘अंतिम अवसर’ प्रदान किया था, जिसके अनुपालन में आज आरोप तय किए गए।
आरोपी और उनका विवरण:
न्यायालय ने जिन अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप तय किए हैं, वे सभी 4 अभियुक्त एक ही परिवार के सदस्य हैं:
- (निवासी: विसोखोर)
- संतोष वर्मा, पुत्र रामचन्द्र (निवासी: कटहरी खुर्द)
- नितीश वर्मा, पुत्र संतोष वर्मा (निवासी: कटहरी खुर्द)
- छोटेलाल वर्मा, पुत्र मुन्नी (निवासी: कटहरी खुर्द)
- प्रियंका वर्मा, पुत्री संतोष वर्मा (निवासी: कटहरी खुर्द)
इन धाराओं के तहत चलेगा मुकदमा (IPC) और संभावित सजा:
अभियुक्तों को निम्नलिखित गंभीर धाराओं में ट्रायल का सामना करना होगा:
- धारा 452 (सबसे गंभीर): मारपीट की तैयारी के साथ घर में घुसना। (सजा: अधिकतम 7 साल का कारावास)।
- धारा 506: जान से मारने की धमकी देना। (सजा: अधिकतम 2 साल तक की जेल या जुर्माना)।
- धारा 147, 427, 323 व 504: बलवा, संपत्ति को नुकसान, मारपीट और शांति भंग करना। अधिकतम 2वर्ष तक की सजा या जुर्माना
बताते चलें कि इसी मामले में दो अभियुक्त संतोष वर्मा और नीतीश वर्मा को वर्ष 2022 में माननीय न्यायालय ने अभियुक्तों का पूर्व अपराधिक इतिहास को देखते हुए जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर 14-14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भी भेजा था जिसमें सत्र न्यायालय द्वारा जमानत स्वीकार करने पर 9-9 दिन अभियुक्तों की रिहाई हुई थी
अगला कदम: साक्ष्य की प्रस्तुति
डिस्चार्ज आवेदन खारिज होने और अब औपचारिक रूप से आरोप तय होने के बाद, मामला अब ‘Prosecution Evidence’ (अभियोजन साक्ष्य) के चरण में पहुँच गया है। न्यायालय अब गवाहों को समन जारी कर उनकी गवाही दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
विशेष टिप्पणी:
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च न्यायालय के नवीनतम निर्देशों के क्रम में, केवल निगरानी याचिका लंबित होने मात्र से निचली अदालत की कार्यवाही तब तक नहीं रुकती जब तक कि ऊपरी अदालत से स्थगन आदेश (Stay Order) न प्राप्त हो। इसी आधार पर न्यायालय ने आज कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपियों पर आरोप तय कर दिए हैं।
