महराजगंज: झूठी FIR के बाद 3 लाख की ‘अवैध वसूली’ का आरोप, विधिक नोटिस जारी

महराजगंज |

​जनपद के थाना कोठिभार क्षेत्र के ग्राम कटहरी खुर्द में एक पुराना कानूनी विवाद अब ‘अवैध वसूली’ और ‘धोखाधड़ी’ के नए आरोपों में घिर गया है। पीड़ित पक्ष की ओर से सिविल कोर्ट के एक अधिवक्ता ने आरोपी गौरव वर्मा को कड़ा विधिक नोटिस जारी कर चेतावनी दी है कि यदि वे अपनी अवैध मांगों से बाज नहीं आए, तो उनके विरुद्ध मानहानि और झूठी गवाही का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

​क्या है पूरा मामला?

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, गौरव वर्मा ने रिंकू वर्मा व अन्य के खिलाफ थाना घुघली में मुकदमा अपराध संख्या 77/2025 (BNS की विभिन्न धाराओं के तहत) दर्ज कराया था। हालांकि, मामले में नया मोड़ तब आया जब 27 फरवरी 2025 को खुद गौरव वर्मा और उनकी पत्नी ममता वर्मा ने क्षेत्राधिकारी (CO) सदर को शपथ पत्र देकर स्वीकार किया कि उक्त FIR “लोगों के बहकावे में आकर” दर्ज कराई गई थी और असल में वह केवल एक “कहासुनी” थी।

​शपथ पत्र में स्वीकारोक्ति के बाद पुलिस ने मामले में अंतिम रिपोर्ट (Final Report – F.R.) माननीय न्यायालय में प्रेषित कर दी थी।

​अवैध वसूली (Extortion) के गंभीर आरोप

​पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता द्वारा भेजे गए नोटिस के अनुसार, अब जब न्यायालय ने गौरव वर्मा को नोटिस जारी किया है, तो वे अपनी पुरानी स्वीकारोक्ति से मुकरने की धमकी दे रहे हैं। आरोप है कि गौरव वर्मा न्यायालय में हाजिर होने के बदले पीड़ित पक्ष से ₹3,00,000/- (तीन लाख रुपये) की अवैध मांग कर रहे हैं।

​नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि आरोपी द्वारा पीड़ित पक्ष को डराया जा रहा है कि पैसे न मिलने पर वे अदालत में झूठ बोलेंगे और अपनी बात से मुकर जाएंगे।

​कानूनी धाराएं और सजा का प्रावधान: कितने साल की हो सकती है जेल?

​विधिक नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि आरोपी का यह कृत्य गंभीर आपराधिक श्रेणियों में आता है, जिसके लिए कानून में सख्त सजा तय की गई है:

  • BNS धारा 308 (2) (अवैध वसूली): किसी व्यक्ति को भय में डालकर उससे अवैध रूप से धन वसूलना (Extortion) एक गंभीर अपराध है। इस धारा के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर 7 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने की सजा हो सकती है।
  • BNSS धारा 379 (झूठी गवाही): न्यायालय में शपथ पत्र देने के बाद मुकरना या झूठा साक्ष्य देना सीधे तौर पर न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है। इसके तहत न्यायालय ‘समरी ट्रायल’ चलाकर दोषी को 3 वर्ष तक की जेल की सजा सुना सकता है।
  • BNS धारा 217: लोक सेवक को गलत सूचना देकर गुमराह करने के मामले में भी 2 वर्ष तक की जेल या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।

​अधिवक्ता की चेतावनी

​विधिक नोटिस के माध्यम से गौरव वर्मा को सचेत किया गया है कि वे तत्काल अवैध वसूली की मांग बंद करें और न्यायालय में उपस्थित होकर अपने पूर्व के शपथ पत्र की पुष्टि करें। चेतावनी दी गई है कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो पीड़ित पक्ष ‘झूठा साक्ष्य देने’, ‘मानहानि’ और ‘अवैध वसूली’ के गंभीर आपराधिक व दीवानी मुकदमे दर्ज कराएगा, जिसका हर्जा-खर्चा गौरव वर्मा को वहन करना होगा।

​इस नोटिस की प्रति थानाध्यक्ष, थाना घुघली को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पारिवारिक और आपसी विवादों में ‘झूठी FIR’ के बढ़ते चलन और उसके बाद होने वाली इस तरह की ‘सौदेबाजी’ पर कानून के जानकारों ने चिंता व्यक्त की है।

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