महराजगंज: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहां एक ओर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और जन-सुनवाई में संवेदनशीलता का दावा कर रही है, वहीं महराजगंज जनपद के सिन्दुरिया थाने से अनुशासनहीनता का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सिन्दुरिया थानाध्यक्ष (SO) राजकुमार सिंह ने पत्रकार से वार्ता के दौरान न केवल अपनी नाराजगी जाहिर की, बल्कि विभाग की गरिमा को ताक पर रखते हुए अपने ही कप्तान (SP) के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी कर डाली।
घटना का पूरा ब्यौरा: “खबर छपी तो भड़के साहब”
पूरा मामला बीते सोमवार का है, जब एक स्थानीय पत्रकार ने थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह से उनके कार्यस्थल पर मुलाकात की। हाल ही में विभिन्न समाचार पत्रों में थानाध्यक्ष द्वारा फोन न उठाने और फरियादियों की शिकायतों में लापरवाही बरतने की खबरें प्रकाशित हुई थीं। अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने के बजाय, साहब का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
पत्रकार के सवालों का जवाब देते हुए थानाध्यक्ष ने अहंकार भरे लहजे में कहा:
“आपने मेरा फोन न उठाना अखबार में छाप दिया? मैं तो अपने एसपी (SP) साहब तक का फोन समय पर नहीं उठाता और 10 मिनट बाद कॉल बैक करता हूँ। जब मैं उनका फोन नहीं उठाता, तो आप क्या चीज हैं?”
अनुशासन और सुरक्षा पर खड़े हुए गंभीर सवाल
थानाध्यक्ष के इस बयान ने पुलिस महकमे के भीतर ‘चेन ऑफ कमांड’ और अनुशासन की धज्जियां उड़ा दी हैं। इस घटना के बाद जनपद में कई सवाल तैर रहे हैं:
- सुरक्षा का संकट: यदि जिले में कोई आपातकालीन स्थिति या दंगा होता है और कप्तान अपने थानाध्यक्ष से संपर्क करना चाहें, तो क्या ’10 मिनट बाद कॉल बैक’ करने की यह नीति जान-माल की सुरक्षा के लिए घातक नहीं होगी?
- जनता की बिसात: जब एक जिम्मेदार पद पर बैठा अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारी (बॉस) के प्रति इतना लापरवाह है, तो थाने के चक्कर काट रहे आम फरियादियों की सुनवाई किस स्तर पर होती होगी?
प्रेस और स्थानीय निवासियों में आक्रोश
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर इस तरह का प्रहार और विभागीय अनुशासनहीनता की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति ने मीडिया जगत में रोष पैदा कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब साहब अपने उच्चाधिकारियों को ही कुछ नहीं समझते, तो आम जनता के लिए थाने के दरवाजे सिर्फ औपचारिकता मात्र रह गए हैं।
क्या होगी कार्रवाई?
पुलिस एक अनुशासित बल है, जहाँ वरिष्ठों के आदेशों का उल्लंघन अक्षम्य माना जाता है। थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह के इस सार्वजनिक अहंकार ने महराजगंज पुलिस की छवि को धूमिल किया है। अब देखना यह होगा कि महराजगंज के पुलिस कप्तान (SP) अपने मातहत के इस उद्दंड व्यवहार और अनुशासनहीनता पर क्या दंडात्मक रुख अपनाते हैं।
ब्यूरो डेस्क, महराजगंज
