महराजगंज: क्या अपराधियों के हाथ में होगी न्याय की कमान? फर्जीवाड़े से अधिवक्ता बनने के आरोपी पर गंभीर आरोप

महराजगंज: न्याय के मंदिर में जहां आम आदमी इंसाफ की उम्मीद लेकर आता है, वहां एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे विधि जगत और बार एसोसिएशन में हड़कंप मचा दिया है। महराजगंज के सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन में एक शिकायत पत्र दाखिल कर सनसनीखेज आरोप लगाया गया है कि एक व्यक्ति ने अपना आपराधिक इतिहास छिपाकर न केवल बार काउंसिल को गुमराह किया, बल्कि फर्जी तरीके से अधिवक्ता का पंजीकरण भी हासिल कर लिया है।

​बार एसोसिएशन का कड़ा रुख: “अपराधियों को जगह नहीं”

​इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के मंत्री श्री प्रमोद त्रिपाठी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अधिवक्ता का पेशा अत्यंत गरिमामयी है। उन्होंने बताया, “ऐसे किसी भी अपराधी को बार की सदस्यता या पंजीकरण किसी भी कीमत पर नहीं दिया जाएगा जो इस तरह के जघन्य अपराधों में संलिप्त हो। न्यायपालिका की पवित्रता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”

​शैक्षिक जालसाजी का नया खुलासा: एक ही सत्र में दो डिग्रियां

​शिकायतकर्ता ने आरोपी नीतीश वर्मा पर शैक्षिक फर्जीवाड़े का एक और बड़ा आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, नीतीश वर्मा ने एक ही सत्र (Academic Session) में दो नियमित (Regular) डिग्रियां हासिल की हैं, जिसमें ITI और ग्रेजुएशन शामिल है। नियमतः दो नियमित पाठ्यक्रम एक साथ करना वर्जित है। आरोप है कि अधिवक्ता पंजीकरण प्राप्त करने के लिए शैक्षिक तथ्यों के साथ भी बड़ी हेराफेरी की गई है।

​शिकायतकर्ता लवकुश पाण्डेय ने खोला मोर्चा

​विसोखोर निवासी शिकायतकर्ता लवकुश पाण्डेय ने इस पूरे मामले को उजागर करते हुए बार एसोसिएशन को साक्ष्यों के साथ पत्र सौंपा है। लवकुश पाण्डेय का कहना है कि आरोपी नीतीश वर्मा ने अपने जघन्य अपराधों और शैक्षिक तथ्यों को छिपाकर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से धोखाधड़ी की है। उन्होंने कहा, “मेरा उद्देश्य इस पवित्र पेशे को कलंकित होने से बचाना है। एक ऐसा व्यक्ति जिस पर 17 मुकदमे दर्ज हों, वह कानून का रक्षक कैसे हो सकता है?”

​SC/ST एक्ट और दलितों का शोषण

​शिकायतकर्ता ने एक अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नीतीश वर्मा और उसका परिवार कानूनी प्रक्रियाओं का हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं। लवकुश पाण्डेय के अनुसार, “यह परिवार समाज के कमजोर, गरीब, दलित और मजदूर व्यक्तियों का मानसिक और आर्थिक शोषण करता है।”

​जघन्य आपराधिक इतिहास और महिलाओं के खिलाफ अपराध

​नीतीश वर्मा (निवासी कटहरी खुर्द) पर साल 2016 से लेकर 2025 तक कुल 17 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें मारपीट, लूट, बलवा और जालसाजी जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आरोपी पर महिलाओं के विरुद्ध अपराध (BNS की धारा 74 – शील भंग करने का प्रयास) और SC/ST एक्ट के तहत विशेष न्यायालय में भी मामले लंबित हैं।

​’वसूली गैंग’ का संगठित नेटवर्क: परिवार के सदस्य भी मुकदमों के घेरे में

​शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि नीतीश वर्मा का पूरा परिवार संगठित तरीके से अपराध में संलिप्त है और SC/ST एक्ट के कई मुकदमों का आरोपी है:

  • पिता (संतोष वर्मा): गुंडा एक्ट और एस.सी./एस.टी. एक्ट सहित 23 मुकदमे।
  • नाना (छोटेलाल): 16 मुकदमे।

​आरोप है कि यह पूरा परिवार वादी बनकर लोगों को कानून के शिकंजे में फंसाता है और फिर समझौते के नाम पर अवैध वसूली का ‘रैकेट’ चलाता है।

​बार काउंसिल उत्तर प्रदेश में शिकायत दर्ज

​लवकुश पाण्डेय ने बताया कि उन्होंने बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश (BCUP) में इस फर्जीवाड़े की औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है। मांग की गई है कि आरोपी का रजिस्ट्रेशन तत्काल निरस्त किया जाए।

ब्यूरो रिपोर्ट, महराजगंज।

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