महाराजगंज ब्यूरो: उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जनपद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा विभाग और कानूनी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। मामला ‘डबल डिग्री’ के कथित फर्जीवाड़े का है, जिसमें एक ही सत्र के दौरान दो नियमित (Regular) कोर्स करने का गंभीर आरोप लगा है।
क्या है पूरा मामला?
निचलौल तहसील के एक जागरूक नागरिक ने राजकीय आईटीआई (ITI), निचलौल में नामांकित एक छात्र, नीतीश वर्मा के शैक्षणिक रिकॉर्ड को लेकर मोर्चा खोल दिया है। आरोप है कि नीतीश वर्मा ने सत्र 2017-2022 के बीच राजकीय आईटीआई से तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ, उसी दौरान नियमित रूप से स्नातक (Graduation) की डिग्री भी हासिल की।
नियमों के मुताबिक, एक ही समय में दो नियमित डिग्रियाँ लेना न केवल अवैध है, बल्कि यह सीधे तौर पर धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।
अधिवक्ता पंजीकरण पर भी उठे सवाल
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब शिकायतकर्ता ने खुलासा किया कि इसी संदिग्ध डिग्री के आधार पर आरोपी ने बार काउंसिल जैसे संवैधानिक निकाय में खुद को एक ‘अधिवक्ता’ के रूप में पंजीकृत करवा लिया। शिकायतकर्ता का तर्क है कि यदि नींव ही फर्जीवाड़े पर टिकी है, तो न्याय की रक्षा करने वाला तंत्र भी दूषित हो रहा है।
RTI अधिकारी के जवाब ने बढ़ाया संदेह
शुरुआत में जब शिकायतकर्ता ने आईटीआई संस्थान से नीतीश की उपस्थिति और नामांकन का विवरण मांगा, तो जन सूचना अधिकारी ने धारा 8(1)(j) का हवाला देते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया। अधिकारी का तर्क था कि यह ‘व्यक्तिगत जानकारी’ है।
हालांकि, अब मामला प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (संयुक्त निदेशक, गोरखपुर मंडल) के पास पहुँच गया है। अपीलार्थी ने पुरजोर तरीके से कहा है कि:
- व्यापक जनहित (Public Interest): सरकारी रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा कोई निजी मामला नहीं है।
- धारा 8(2) का प्रहार: आरटीआई कानून की यह धारा स्पष्ट करती है कि यदि भ्रष्टाचार या फर्जीवाड़े को उजागर करने में जनहित अधिक है, तो ‘गोपनीयता’ का तर्क नहीं दिया जा सकता।
बार काउंसिल की कार्रवाई और कोर्ट जाने की चेतावनी
शिकायतकर्ता ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि यह फर्जीवाड़ा प्रमाणित होता है, तो बार काउंसिल न केवल आरोपी का अधिवक्ता लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त करेगी, बल्कि धोखाधड़ी और जालसाजी जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करवाकर जेल भेजने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय के भीतर धारा 8(2) के अनुपालन में वांछित सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो इस मामले को राज्य सूचना आयोग तक ले जाया जाएगा और माननीय उच्च न्यायालय में रिट याचिका (Writ Petition) दायर की जाएगी।
आगे क्या?
अपील के साथ आरोपी छात्र की हाईस्कूल मार्कशीट भी संलग्न की गई है ताकि पहचान की पुष्टि हो सके। अब सबकी निगाहें गोरखपुर मंडल के संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण) पर टिकी हैं। यदि यह सूचना सार्वजनिक होती है, तो न केवल आरोपी की डिग्री रद्द होगी, बल्कि कानूनी पेशे से उनका निष्कासन भी तय माना जा रहा है।
शिकायतकर्ता का बयान: “यह न्याय प्रणाली के साथ बड़ा खिलवाड़ है। हम प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर बार काउंसिल के जरिए लाइसेंस निरस्त करवाएंगे और गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करवाकर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजेंगे।”
रिपोर्टर: डिजिटल डेस्क
