महराजगंज:कोठीभार भू-माफिया परिवार का सार्वजनिक संपत्ति पर ‘अटैक’, 5.50 लाख का जुर्माना और IT विभाग की रडार पर ‘काली कमाई’

महराजगंज | विशेष संवाददाता

​जनपद महराजगंज में कोठीभार थाना क्षेत्र का एक रसूखदार परिवार प्रशासन और कानून के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। कुख्यात अपराधी संतोष वर्मा के साथ-साथ अब उसके परिवार के अन्य सदस्यों पर भी खेल के मैदान जैसी सार्वजनिक संपत्तियों को हड़पने और अवैध साम्राज्य खड़ा करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

खेल के मैदान पर कब्जा: 5.50 लाख का जुर्माना और हाईकोर्ट का ‘स्टे’

​ताजा खुलासे के अनुसार, संतोष वर्मा के भाई बैजनाथ वर्मा और भतीजे गौरव वर्मा ने विसोखोर स्थित खेल के मैदान पर अवैध रूप से कब्जा कर उसका व्यावसायिक उपयोग शुरू कर दिया है।

  • ध्वस्तीकरण के आदेश: प्रशासन ने पूर्व में इस कब्जे को अवैध मानते हुए इसे ध्वस्त करने और 5.50 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाने की कार्यवाही की थी।
  • कानूनी दांव-पेच: वर्तमान में मामला माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, जहां कोर्ट ने अंतरिम स्थगन (Stay) दिया है। हालांकि, सूत्र बताते हैं कि प्रशासन इस स्टे को निरस्त कराने की प्रभावी पैरवी कर रहा है ताकि खेल के मैदान को मुक्त कराया जा सके।

लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत मुकदमे

​इन भू-माफियाओं का दुस्साहस यहीं नहीं थमा। स्थानीय थाना कोठीभार में इन आरोपियों के विरुद्ध लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम (धारा 3/5) और धारा 447 IPC के तहत मुकदमे भी दर्ज हैं। इसके अलावा, इनका आपराधिक इतिहास काफी पुराना है:

  • 2015 से अपराध की दुनिया: इन पर वर्ष 2015 में मारपीट और धमकी (323/504 IPC) और गंभीर चोट पहुंचाने (323/325/504/506 IPC) के पुराने मामले दर्ज हैं।

आयकर विभाग (IT) की रडार पर ‘अवैध संपत्ति’

​सबसे बड़ा खुलासा यह है कि इस परिवार की अकूत और अवैध संपत्ति अब आयकर विभाग (Income Tax Department) की जांच के दायरे में है। विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि अपराध और अवैध कब्जों के जरिए कितना धन अर्जित किया गया है और इसका स्रोत क्या है।

6 महीने से न्याय की ‘फाइल’ पर लगा है ब्रेक

​एक तरफ यह परिवार नए-नए विवादों में घिर रहा है, वहीं दूसरी तरफ संतोष वर्मा के विरुद्ध चल रहे गुंडा एक्ट मामले की पत्रावली 13 अगस्त 2025 से अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के कार्यालय में आदेश के लिए ‘जाम’ पड़ी है।

​पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस विलंब का मुख्य उद्देश्य आरोपियों को कानूनी कार्यवाही से बचाना और उन्हें अपना प्रभाव बढ़ाने का मौका देना है।

डीएम से मांग: “पूरे गिरोह पर हो ‘गैंगस्टर’ की कार्यवाही”

​पीड़ित पक्ष और क्षेत्र की जनता ने मांग की है कि:

  1. ​सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करने वाले इस गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्यवाही हो।
  2. ​लंबित गुंडा एक्ट की पत्रावली को किसी कर्मठ और निष्पक्ष अधिकारी को हस्तांतरित कर तुरंत फैसला सुनाया जाए।
  3. ​आयकर विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से इनकी ‘अवैध संपत्तियों’ की कुर्की करे।

​अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या जिला प्रशासन इन प्रभावशाली भू-माफियाओं के खिलाफ कड़ा एक्शन लेता है या न्याय की फाइलें इसी तरह धूल फांकती रहेंगी।

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