महाराजगंज: सरकारी खलिहान पर ‘भू-माफिया’ का पक्का कब्जा, अब क्या चलेगा बाबा का बुल्डोजर?

निचलौल, महाराजगंज। उत्तर प्रदेश में अवैध कब्जों के खिलाफ जारी सख्त अभियान के बीच, जनपद महाराजगंज के निचलौल तहसील से एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम कटहरी कला में सार्वजनिक खलिहान की भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है। प्रार्थी सरफराज ने उपजिलाधिकारी (SDM) को पत्र लिखकर भू-माफियाओं के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

​शिकायत के अनुसार, गाटा संख्या 193 (रकबा 0.368 हेक्टेयर), जो सरकारी अभिलेखों में सार्वजनिक खलिहान के रूप में दर्ज है, पर गांव के ही कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा अवैध रूप से पक्का निर्माण कर लिया गया है। आरोप है कि मुख्य आरोपी मोहिद्दीन अंसारी, जो वर्तमान में ग्राम प्रधान और एक सरकारी स्कूल में मास्टर भी हैं, ने अपने भाइयों के साथ मिलकर इस बेशकीमती जमीन को कब्जाया है।

कोर्ट से खारिज हुआ ‘फर्जी पट्टा’

​हैरानी की बात यह है कि इस भूमि पर पहले भी 2003 और 2023 में बेदखली की कार्रवाई हो चुकी है। प्रार्थी का आरोप है कि भू-माफिया ने फर्जी तरीके से जमीन का पट्टा तैयार करवाया था और मामला कोर्ट में लंबित बताकर अधिकारियों को गुमराह करता रहा। हालांकि, ताजा जानकारी के अनुसार, अब वह फर्जी पट्टा जिलाधिकारी (DM) की अदालत से खारिज कर दिया गया है।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:

  • प्रशासनिक लापरवाही: दो बार बेदखली के बावजूद कब्जा बरकरार रहना तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।
  • धोखाधड़ी के आरोप: आरोपियों के खिलाफ धारा 419 और 420 के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है।
  • धार्मिक उन्माद की साजिश: पत्र में एक विवादास्पद घटना का भी जिक्र है, जिसमें एक फोटो के माध्यम से गांव का सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश का आरोप लगाया गया है।

ग्रामीणों की मांग: ‘बुल्डोजर एक्शन’

​ग्रामवासियों का कहना है कि जब सरकार का रुख अवैध कब्जों पर साफ है, तो फिर इस खलिहान को अब तक खाली क्यों नहीं कराया गया? ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन बिना किसी देरी के अवैध निर्माण पर ‘बुल्डोजर’ चलाकर सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराए।

​अब देखना यह होगा कि निचलौल प्रशासन इस शिकायत पर कितनी तेजी से संज्ञान लेता है और क्या भू-माफियाओं के खिलाफ योगी सरकार का हंटर चलता है या नहीं।

ब्यूरो रिपोर्ट, महाराजगंज।

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