विशेष संवाददाता
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों और भरण-पोषण (Maintenance) से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण मिसाल कायम की है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई पत्नी अपनी नौकरी, वास्तविक आय और वित्तीय संपत्तियों की जानकारी छिपाती है, तो वह सीआरपीसी की धारा 125 (Section 125 CrPC) के तहत भरण-पोषण पाने की हकदार नहीं होगी।
मामला क्या है?
यह फैसला जस्टिस आलोक जैन की पीठ ने एक महिला द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए सुनाया। महिला ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसने उसे गुजारा भत्ता देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने पाया कि महिला न केवल उच्च शिक्षित है (B.Ed. और M.A. डिग्री धारक), बल्कि वह लगातार रोजगार में भी रही है।
कोर्ट की तीखी टिप्पणी: “साफ हाथों के साथ आएं अदालत”
सुनवाई के दौरान जस्टिस जैन ने कड़े शब्दों में कहा, “जब कोई व्यक्ति न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाता है, तो उसे ‘स्वच्छ हाथों, स्वच्छ मन और स्वच्छ उद्देश्य’ के साथ आना चाहिए। न्यायिक प्रक्रिया का उपयोग किसी को परेशान करने या अनुचित लाभ उठाने के लिए नहीं किया जा सकता।”
फैसले की मुख्य बातें:
- संपत्ति का खुलासा न करना: अदालत ने गौर किया कि याचिकाकर्ता महिला के पास किसान विकास पत्र और पीपीएफ (PPF) खातों में 15 लाख रुपये से अधिक जमा थे। इसके बावजूद उसने खुद को बेसहारा और पिता पर निर्भर बताया था।
- आय का छिपाना: महिला ने अपने सैलरी अकाउंट और वास्तविक वेतन की जानकारी छिपाई, जबकि पति की आय को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया।
- सहानुभूति का गलत प्रयास: महिला ने दावा किया था कि उसने एक बच्ची को गोद लिया है, लेकिन इसके कोई कानूनी दस्तावेज पेश नहीं कर सकी। कोर्ट ने इसे केवल सहानुभूति बटोरने का एक ‘दुर्भावनापूर्ण प्रयास’ करार दिया।
- कानून का उद्देश्य: अदालत ने स्पष्ट किया कि धारा 125 CrPC का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को दरिद्रता से बचाना है, न कि इसे ‘अनुचित समृद्धि’ का जरिया बनाना।
निष्कर्ष
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता आत्मनिर्भर है और उसके पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन मौजूद हैं। ऐसे में उसे गुजारा भत्ता देना कानून की भावना के विपरीत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन मामलों में लगाम लगाएगा जहाँ वैवाहिक विवादों के दौरान वित्तीय जानकारी छिपाई जाती है।
रिपोर्ट: न्यूज़ डेस्क
