महाराजगंज (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के दावों के बीच महाराजगंज से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक महिला ने सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मंडल अध्यक्ष पर गंभीर आपराधिक वारदातों में शामिल होने और पुलिस की मिलीभगत से बचने का आरोप लगाया है। यह मामला अब जिले में चर्चा का विषय बन गया है कि क्या सत्ता का पद किसी अपराधी के लिए ‘सुरक्षा कवच’ बन सकता है?
सत्ता की हनक और संगीन जुर्म
सिसवा बुजुर्ग निवासी द्वारा पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए शिकायती पत्र में सीधा आरोप लगाया गया है कि वरुण उर्फ राजन पटेल, जो वर्तमान में भाजपा का मंडल अध्यक्ष है, अपने पद और राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर आपराधिक मामलों को रफा-दफा करवा रहा है।
पीड़िता का दावा है कि आरोपी पर पहले से ही कई गंभीर मामले दर्ज हैं:
- नाबालिग से छेड़खानी: आरोपी पर 2020 में पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और महिला उत्पीड़न की धाराओं में दो मुकदमे (मु.अ.सं. 82/2020 और 150/2020) दर्ज हुए थे।
- अपराध की फेहरिस्त: इसके अलावा बलवा, मारपीट (धारा 147, 148, 452) और तोड़फोड़ के भी कई मामले दर्ज हैं।
पुलिस पर ‘सुविधा शुल्क’ और मिलीभगत का आरोप
रिपोर्ट के मुताबिक, कोठीभार पुलिस पर आरोप है कि वह मंडल अध्यक्ष के दबाव में या “आर्थिक लाभ” लेकर निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है। राजवंती देवी का कहना है कि पुलिस जानबूझकर विवेचना में ढिलाई बरत रही है ताकि आरोपी को कानूनी शिकंजे से बचाया जा सके। सत्ताधारी दल का पदाधिकारी होने के कारण गवाह भी डर के मारे सामने आने से कतरा रहे हैं।
विवेचना ट्रांसफर करने की मांग
पीड़िता ने मुकदमा संख्या 161/2021 का हवाला देते हुए मांग की है कि जांच को तत्काल कोठीभार थाने से हटाकर किसी स्वतंत्र अधिकारी को सौंपा जाए। शिकायती पत्र में यह भी अंदेशा जताया गया है कि यदि स्थानीय पुलिस ही जांच करती रही, तो सत्ता के दबाव में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है।
क्या कहती है राजनीति?
एक तरफ जहाँ प्रदेश सरकार अपराधियों पर नकेल कसने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर एक मंडल अध्यक्ष स्तर के पदाधिकारी पर पॉक्सो जैसे गंभीर आरोप और पुलिस की संदिग्ध भूमिका संगठन की छवि पर भी सवाल खड़े कर रही है। अब सबकी नजरें पुलिस अधीक्षक के अगले कदम पर टिकी हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, महाराजगंज।
