महाराजगंज: स्वच्छ भारत मिशन के बड़े-बड़े दावों के बीच जनपद के निचलौल तहसील से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो स्थानीय प्रशासन और ग्राम प्रधान की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
बीमारियों के मुहाने पर खड़ा लोढ़िया गांव
ताजा मामला निचलौल तहसील के ग्राम लोढ़िया (पोस्ट कटहरी) का है, जहाँ पूरा गांव मानो एक डंपिंग यार्ड बन गया है। यहाँ के निवासी मोती चौहान के घर के ठीक सामने पूरे गांव का गंदा पानी और कीचड़ जमा हो रहा है। आलम यह है कि घर से निकलना दूभर हो गया है और चौबीसों घंटे उठने वाली दुर्गंध ने जीना मुहाल कर दिया है।
संक्रामक रोगों का खतरा, प्रशासन मौन
पीड़ित मोती चौहान का आरोप है कि जमा पानी की वजह से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और परिवार के सदस्य लगातार बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार ग्राम प्रधान से गुहार लगाई गई, लेकिन सत्ता के नशे में चूर या लापरवाह व्यवस्था ने उनकी एक न सुनी। प्रधान की अनदेखी से तंग आकर अब पीड़ित ने जिलाधिकारी (DM) का दरवाजा खटखटाया है।
मुख्य बिंदु जो रिपोर्ट में उठाए गए हैं:
- अनदेखी: ग्राम प्रधान द्वारा शिकायत के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
- स्वास्थ्य संकट: संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
- मांग: पीड़ित ने डीएम से मांग की है कि नाली के गंदे पानी को तत्काल डायवर्ट किया जाए ताकि उनके परिवार की जान बचाई जा सके।
पत्रकार की कलम से:
”क्या लोढ़िया गांव के इस परिवार को न्याय मिलेगा? क्या प्रशासन तब जागेगा जब कोई बड़ी महामारी इस गांव को अपनी चपेट में ले लेगी? एक तरफ हम स्मार्ट सिटी और आदर्श गांवों की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ जलभराव जैसी बुनियादी समस्या के लिए एक गरीब ग्रामीण को जिलाधिकारी तक पत्र लिखना पड़ रहा है। यह स्थानीय निकाय की विफलता का जीता-जागता प्रमाण है।”
ब्यूरो रिपोर्ट, महाराजगंज।
