निचलौल (महाराजगंज)। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले से जालसाजी का एक ऐसा रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है जिसने न केवल प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है, बल्कि इंसानियत को भी शर्मसार कर दिया है। तहसील निचलौल के ग्राम सभा कटहरी कला में एक बेसहारा विधवा की जमीन हड़पने के लिए ‘साजिश का ऐसा चक्रव्यूह’ रचा गया, जिसमें एक मृत व्यक्ति को कागज पर ‘जिंदा’ कर उससे अंगूठा लगवा लिया गया।
🔴 हेडलाइंस: क्या है पूरा मामला?
मामला ग्राम कटहरी कला की निवासी श्रीमती लालती भारती का है। पीड़िता का आरोप है कि गांव के ही एक रसूखदार व्यक्ति, रामसेवक, ने उनके स्वर्गीय पति पुनवासी भारती के नाम पर एक फर्जी समझौता पत्र तैयार किया है। इस खेल का मुख्य मकसद पीड़िता को उसके पुश्तैनी घर और जमीन से बेदखल करना है।
🕵️ कूटनीति का पर्दाफाश: दिसंबर 2025 का स्टांप और 2023 की तारीख!
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा दस्तावेजों की तारीखों को लेकर हुआ है। खबरों और पीड़िता के दावों के मुताबिक:
- बैक डेट का खेल: आरोपी ने ₹50 के जिस स्टांप पेपर पर समझौता दिखाया है, वह कथित तौर पर दिसंबर 2025 में खरीदा गया है।
- शातिर चाल: हैरान करने वाली बात यह है कि इस हालिया खरीदे गए स्टांप पर तारीख 02-04-2023 दर्ज की गई है।
- मकसद: यह जालसाजी इसलिए की गई ताकि यह साबित किया जा सके कि जब पुनवासी भारती जीवित थे, तब उन्होंने अपनी मर्जी से जमीन का समझौता किया था। लेकिन ‘डिजिटल इंडिया’ के इस दौर में स्टांप की खरीद की असली तारीख ने इस पूरी साजिश की कलई खोल कर रख दी है।
🗣️ पीड़िता की दहाड़: “जो मर गया, वह वापस कैसे आया?”
न्याय की गुहार लगाते हुए पीड़िता लालती भारती ने तहसीलदार निचलौल को सौंपे अपने पत्र में सीधे सवाल किए हैं। भावुक और आक्रोशित स्वर में पीड़िता ने पूछा— “मेरे पति अब इस दुनिया में नहीं हैं, तो क्या वे स्वर्ग से उतरकर जमीन पर अंगूठा लगाने आए थे?”
पीड़िता के मुख्य आरोप:
- जालसाजी: मृत पति के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान पूरी तरह फर्जी और कूट रचित हैं।
- बेघर करने की साजिश: फर्जी कागजात के दम पर उन्हें उनके ही घर से निकाला जा रहा है।
- दर-दर की ठोकरें: वर्तमान में पीड़िता के पास रहने का कोई ठिकाना नहीं है और वह दूसरों के घरों में शरण लेने को मजबूर है।
🔍 फॉरेंसिक जाँच की मांग: क्या फिंगरप्रिंट खोलेंगे राज?
यह मामला केवल एक विधवा की जमीन का नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह की ओर इशारा कर रहा है। पीड़िता ने प्रशासन से मांग की है कि:
- कथित स्टांप पेपर की फॉरेंसिक (फिंगरप्रिंट) जाँच कराई जाए।
- स्टांप विक्रेता और गवाहों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच हो।
स्थानीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मामले की गहराई से जांच हुई, तो क्षेत्र में सक्रिय ‘बैक-डेट’ में दस्तावेज तैयार करने वाले एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हो सकता है।
⚖️ प्रशासनिक रुख और जनता की नजर
तहसीलदार निचलौल को शिकायती पत्र मिलने के बाद अब गेंद प्रशासन के पाले में है। पूरे निचलौल क्षेत्र में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। सवाल वही है— क्या योगी सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ वाले राज में एक गरीब विधवा को उसका हक मिलेगा? या फिर भू-माफिया सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर एक बेसहारा की छत छीन लेंगे?
ब्यूरो रिपोर्ट, महाराजगंज।
सच्चाई की जीत तक हमारी नजर इस खबर पर बनी रहेगी।
