कानपुर | उत्तर प्रदेश के कानपुर में नाबालिग छात्रा के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में नया मोड़ आ गया है। मुख्य आरोपी और 50 हजार के इनामी दरोगा अमित कुमार मौर्य की गिरफ्तारी न होने के बीच, पीड़िता के भाई को व्हाट्सएप पर अज्ञात नंबर से धमकियां मिल रही हैं। धमकी भरे संदेशों में आरोपी दरोगा का बचाव करते हुए उसे ‘समाज सेवक’ बताया गया है और परिवार को अंजाम भुगतने की चेतावनी दी गई है।
मुख्य बिंदु:
- धमकी का मजमून: “दरोगा की नौकरी से मत खेलो, वह गलत नहीं है। तुम्हारी मदद सात जन्मों तक कोई नहीं करेगा।”
- फरार आरोपी: दरोगा अमित कुमार मौर्य पर 50 हजार का इनाम घोषित है, पुलिस की 4 टीमें छापेमारी कर रही हैं।
- कड़ी कार्रवाई: मामले में लापरवाही बरतने पर अब तक डीसीपी वेस्ट समेत 5 पुलिसकर्मियों पर गाज गिर चुकी है।
विस्तृत रिपोर्ट
धमकी से खौफ में पीड़ित परिवार
बीती 5 जनवरी को हुई इस हृदयविदारक घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है। इसी बीच, पीड़िता के भाई के मोबाइल पर व्हाट्सएप के जरिए 10 अलग-अलग संदेश आए। इन मैसेज में लिखा था, “दरोगा जी बहुत शरीफ हैं, उन्हें समाज सेवा करने दो। उनकी जमानत हो चुकी है और अब ऐसी लाइफ होगी कि तुम्हारी आंखों से आंसू भी नहीं सूखेंगे।” इन संदेशों के बाद पीड़ित परिवार गहरे सदमे और दहशत में है।
पुलिस की कार्रवाई और प्रशासनिक फेरबदल
कानपुर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी दरोगा की तलाश तेज कर दी है। बनारस, प्रयागराज, मेरठ और गोरखपुर जैसे शहरों में दबिश दी जा रही है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में आरोपी की फोटो सर्कुलेट की गई है।
प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ी कार्रवाई की गई है:
- दिनेश त्रिपाठी (डीसीपी वेस्ट): मुख्यालय से संबद्ध (हटाए गए)।
- विक्रम सिंह (इंस्पेक्टर, सचेंडी): निलंबित।
- दिनेश कुमार (चौकी प्रभारी): निलंबित।
- शिखर कुमार (एसीपी पनकी): लाइन हाजिर।
- सुभाष चंद्र (विवेचना अधिकारी): जांच से हटाए गए।
क्या है पूरा मामला?
5 जनवरी को कानपुर में एक नाबालिग छात्रा का अपहरण कर कार में गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया गया था। इस मामले में शिवबरन सिंह और दरोगा अमित कुमार मौर्य को नामजद किया गया था। पुलिस ने शिवबरन को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन वर्दी वाला आरोपी अमित मौर्य कानून की गिरफ्त से बाहर है।
निष्कर्ष: खाकी पर लगे इस दाग ने पुलिस महकमे की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर एक भगोड़ा दरोगा और उसके समर्थक पीड़ित परिवार को धमकाने का दुस्साहस कर रहे हैं। अब देखना यह है कि कानपुर पुलिस इस इनामी दरोगा को कब तक सलाखों के पीछे पहुँचा पाती है।
