आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में कानून की चौखट पर 17 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार पीड़ितों को न्याय मिला है। एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट और मारपीट के एक पुराने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए एडीजे-2 (ADJ-2) एससी-एसटी कोर्ट ने पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला थाना शमसाबाद के गांव खेड़ा का है। 3 मार्च 2008 को पुरानी रंजिश के चलते गांव के ही कुछ दबंगों ने एक दलित परिवार पर लाठी-डंडों से हमला किया था। गांव निवासी प्यारेलाल की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने उनके भाई, भतीजे, पत्नी और बेटी के साथ बेरहमी से मारपीट की थी, जिसमें वे घायल हो गए थे।
कोर्ट का सख्त फैसला
एडीजे-2 एससी-एसटी कोर्ट ने मामले की गंभीरता और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी जगदीश, दिलीप, रामस्वरूप, सोनू और राकेश को दोषी पाया। कोर्ट ने सजा का एलान करते हुए निम्नलिखित आदेश दिए:
- कारावास: सभी पांचों दोषियों को 5-5 साल की जेल।
- जुर्माना: प्रत्येक दोषी पर 65-65 हजार रुपये का जुर्माना (कुल 3.25 लाख रुपये)।
- अतिरिक्त सजा: जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
दो आरोपियों की मौत, 17 साल का सफर
पुलिस ने इस मामले में कुल 7 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान दो अन्य आरोपियों की मौत हो गई, जिसके चलते उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया बंद कर दी गई थी। 2008 में शुरू हुई यह कानूनी लड़ाई 2025 के अंत में जाकर मुकाम पर पहुंची है।
पीड़ित परिवार ने फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही न्याय मिलने में समय लगा, लेकिन अदालत ने दोषियों को सजा देकर यह साबित कर दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
