उन्नाव बलात्कार कांड में न्याय की लड़ाई अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को मिली अंतरिम राहत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित (सस्पेंड) कर उसे जमानत दी गई थी।
सीबीआई ने अपनी विशेष अनुमति याचिका (SLP) में तर्क दिया है कि हाई कोर्ट का फैसला पीड़िता के मनोबल और न्याय प्रक्रिया के सिद्धांतों के विपरीत है।
कानूनी पेच और हाई कोर्ट का फैसला
हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने सेंगर को जमानत दी थी। अदालत का तर्क था कि चूंकि दोषी की मुख्य अपील (दोषसिद्धि के खिलाफ) अभी लंबित है, इसलिए उसे सजा के निलंबन का लाभ दिया जा सकता है।
बता दें कि 2019 में ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को एक 17 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार का दोषी पाया था और उसे ‘मरते दम तक’ जेल (उम्रकैद) की सजा के साथ 25 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया था।
’मेरे लिए काल के समान है यह फैसला’ – पीड़िता
जमानत की खबर मिलते ही पीड़िता और उसके परिवार में हड़कंप मच गया था। पीड़िता ने एक वीडियो संदेश के जरिए अपनी सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था:
“सेंगर का जेल से बाहर आना मेरे और मेरे गवाहों के लिए काल के समान है। प्रशासन ने हमें सुरक्षा तो दी है, लेकिन सेंगर का रसूख इतना है कि हमें अपनी जान का खतरा हर पल महसूस होता है।”
क्यों अभी भी सलाखों के पीछे रहेगा सेंगर?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले भी सेंगर का तुरंत जेल से बाहर आना मुश्किल है। इसकी मुख्य वजह यह है कि वह केवल बलात्कार मामले में ही नहीं, बल्कि पीड़िता के पिता की कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) और हत्या के षड्यंत्र के मामले में भी 10 साल की सजा काट रहा है। जब तक उस मामले में भी उसे जमानत नहीं मिलती, वह जेल से बाहर नहीं आ सकेगा।
सीबीआई की दलीलें और आगामी सुनवाई
सीबीआई सुप्रीम कोर्ट में यह दलील दे सकती है कि:
- अपराध की प्रकृति: यह एक जघन्य अपराध है जिसमें एक जनप्रतिनिधि ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया।
- गवाहों की सुरक्षा: दोषी का बाहर आना गवाहों को डराने-धमकाने का कारण बन सकता है।
- हाई कोर्ट की त्रुटि: इतनी गंभीर सजा (उम्रकैद) के मामले में जमानत देना न्याय के व्यापक हितों के खिलाफ है।
अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर हैं, जो यह तय करेगा कि उन्नाव की बेटी के गुनहगार को सलाखों के पीछे ही रहना चाहिए या उसे बाहर आने की अनुमति दी जाएगी।
