दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए उन्नाव दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली पीठ ने सेंगर द्वारा दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए सजा के क्रियान्वयन को निलंबित कर दिया है और उन्हें सशर्त जमानत की अनुमति दी है।
न्यायिक आदेश के मुख्य कानूनी बिंदु:
- सजा का निलंबन : न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की प्रासंगिक धाराओं के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए, मुख्य अपील के लंबित रहने तक दोषसिद्धि के प्रभाव को स्थगित कर दिया है।
- जमानत की शर्तें : – अभियुक्त को 15 लाख रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि की तीन प्रतिभूतियां प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
- प्रतिबंधात्मक आदेश: न्यायालय ने एक सुरक्षात्मक घेरा निर्धारित किया है, जिसके तहत सेंगर उत्तरजीविता के निवास स्थान से 5 किलोमीटर के दायरे में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।
- अनुपालन और निगरानी: – अभियुक्त को अपना पासपोर्ट संबंधित अधिकारी के पास समर्पण करना होगा।
- उन्हें नियमित रूप से प्रत्येक सोमवार को स्थानीय पुलिस स्टेशन के समक्ष उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
मामले का संक्षिप्त इतिहास और कानूनी पृष्ठभूमि:
यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 और पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत वर्ष 2017 में दर्ज किया गया था। घटनाक्रम तब और जटिल हो गया था जब पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मृत्यु हो गई और बाद में रायबरेली में एक संदिग्ध वाहन दुर्घटना हुई।
निचली अदालत का निर्णय (2019): दिसंबर 2019 में दिल्ली की एक विशेष अदालत (तीस हजारी) ने सेंगर को ‘मृत्यु पर्यंत आजीवन कारावास’ की सजा सुनाई थी और 25 लाख रुपये का आर्थिक दंड आरोपित किया था। इस निर्णय को सेंगर ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जो वर्तमान में विचाराधीन है।
अभियोजन और बचाव पक्ष के तर्क:
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अपील के निस्तारण में लंबा समय लग सकता है और सजा के निलंबन के लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद हैं। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने सुरक्षा और मामले की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सख्त शर्तों के साथ राहत प्रदान करने का निर्णय लिया।
कानूनी निष्कर्ष:
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि जमानत की शर्तों का कोई भी उल्लंघन पाया जाता है, तो अभियोजन पक्ष तत्काल जमानत रद्द करने के लिए आवेदन करने हेतु स्वतंत्र होगा। यह आदेश केवल सजा के निलंबन तक सीमित है और मुख्य अपील की मेरिट पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।
विधि संवाददाता
