अपराधी छवि वाले वकीलों पर गिरेगी गाज, बार काउंसिल ने हाईकोर्ट को दी लाइसेंस निलंबन की जानकारी

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के कानूनी हलकों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब यूपी बार काउंसिल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को सूचित किया कि वह उन वकीलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने जा रहा है जो ‘हिस्ट्रीशीटर’ (अपराधिक इतिहास वाले) हैं। बार काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि ऐसे वकीलों के लाइसेंस निलंबित किए जाएंगे जिनके खिलाफ गम्भीर किस्म के अपराधिक मुकदमे दर्ज है।

​हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बड़ा कदम

​इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही एक सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। न्यायालय ने पहले भी वकालत के पेशे में बढ़ती अपराधीकरण की प्रवृत्ति पर चिंता जताई थी। बार काउंसिल ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि कानूनी पेशे की गरिमा बनाए रखने के लिए यह शुद्धिकरण अभियान आवश्यक है।

​SHOs को दिए गए निर्देश

​इस प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए पुलिस प्रशासन को भी सक्रिय किया गया है। राज्य के सभी थाना प्रभारियों (SHOs) को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे वकीलों के चरित्र और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की पुष्टि करें।

​क्या होगा असर?

  1. लाइसेंस निलंबन: यदि किसी वकील के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले पाए जाते हैं तो बार काउंसिल तत्काल प्रभाव से उनका वकालत करने का लाइसेंस सस्पेंड कर देगा।
  2. पेशेवर शुचिता: इस कदम का उद्देश्य वकालत जैसे गरिमामय पेशे से उन तत्वों को बाहर निकालना है जो समाज में कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं।
  3. सत्यापन अभियान: अब वकालत के नए और पुराने दोनों तरह के पंजीकरणों में पुलिस सत्यापन (Police Verification) की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।

​कानूनी जानकारों की राय

​कानूनी जानकारों का मानना है कि बार काउंसिल का यह फैसला स्वागत योग्य है। लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को अदालतों में पैरवी करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए, क्योंकि इससे न केवल न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है बल्कि अधिवक्ताओं की छवि पर भी बुरा असर पड़ता है।

​यह कार्रवाई आने वाले दिनों में और तेज होने की उम्मीद है, जिससे यूपी के कानूनी ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

ब्यूरो रिपोर्ट, प्रयागराज

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *