इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: आपराधिक मामलों में अब पुलिस को ईमेल से भेजने होंगे निर्देश, धीमी ICJS प्रगति पर जताई गंभीर चिंता

​इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में आपराधिक न्याय प्रणाली की गति में सुधार लाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) को आदेश दिया है कि जमानत और अन्य आपराधिक मामलों से संबंधित सभी पुलिस निर्देश और जानकारी तत्काल प्रभाव से मैन्युअल तरीके के बजाय इलेक्ट्रॉनिक मोड, यानी ईमेल, के माध्यम से सरकारी वकील के कार्यालय को भेजी जाए।

​न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि निर्देशों को पुलिस स्टेशन से कोर्ट तक पहुंचाने की वर्तमान मैन्युअल प्रक्रिया में दो सप्ताह से अधिक का समय लगता है, जिससे एक व्यक्ति की स्वतंत्रता (Liberty) प्रभावित होती है, खासकर जमानत के मामलों में।

“समय और पैसे की बर्बादी”

​कोर्ट ने मौजूदा व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इसमें पुलिसकर्मी अनावश्यक रूप से एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक यात्रा करते हैं, जो “पुलिस कर्मियों और जनता के पैसे की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं है।”

​वर्तमान में, जमानत नोटिस मिलने पर उसे ‘पैरोकार’ के माध्यम से जिले के एसपी कार्यालय भेजा जाता है, जो फिर संबंधित पुलिस स्टेशन को भेजता है। इसके बाद जांच अधिकारी (IO) केस डायरी तैयार करता है और पूरी प्रक्रिया उलट दिशा में लौटती है, जिसमें अत्यधिक समय बर्बाद होता है।

ICJS के धीमे क्रियान्वयन पर फटकार

​कोर्ट ने इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के धीमी गति से क्रियान्वयन पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। ICJS परियोजना 2009 में शुरू की गई थी, जिसके लिए “हजारों करोड़ रुपये” आवंटित किए गए, लेकिन 16 साल बाद भी प्रगति संतोषजनक नहीं है।

​ICJS का मूल सिद्धांत “वन डेटा वन एंट्री” है, जिसका अर्थ है कि पुलिस द्वारा एक बार दर्ज किया गया डेटा कोर्ट, जेल और फोरेंसिक लैब को तुरंत उपलब्ध हो जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यदि सरकारी वकील के कार्यालय को ICJS के माध्यम से सीधे डेटाबेस तक पहुंच मिल जाए, तो केस डायरी और आपराधिक इतिहास कुछ ही घंटों में प्राप्त हो सकते हैं।

कर्मचारियों की कमी और अंतरिम उपाय

​चूंकि ICJS 2.0 को पूरी तरह से लागू होने में समय लग रहा है, कोर्ट ने डीजीपी को अंतरिम व्यवस्था के तौर पर जॉइंट डायरेक्टर (अभियोजन) के कार्यालय को एक नामित ईमेल आईडी पर निर्देश भेजने का आदेश दिया है।

​इसके अलावा, कोर्ट ने यूपी के मुख्य सचिव को तत्काल प्रभाव से जॉइंट डायरेक्टर (अभियोजन) के कार्यालय को पर्याप्त कर्मचारी (विशेष रूप से पाँच अतिरिक्त व्यक्तियों) उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, क्योंकि वर्तमान में यह कार्यालय केवल पाँच व्यक्तियों के साथ काम कर रहा है।

​कोर्ट ने मुख्य सचिव को एक IPS अधिकारी को नामित करने का भी निर्देश दिया, जो ICJS प्लेटफॉर्म पर डेटा एकीकरण की निगरानी करेगा, ताकि वन विभाग और नगर निगम जैसे अन्य राज्य कार्य भी इस परियोजना का हिस्सा बन सकें।

​यह निर्देश जस्टिस देशवाल ने रत्वर सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए दिया।

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