महाराजगंज जेल में दुष्कर्म आरोपी की संदिग्ध मौत:अधिवक्ता ने न्यायिक हिरासत में मानवाधिकार हनन का लगाया गंभीर आरोप, NHRC से जाँच की मांग

 

 

महराजगंज ।जिला जेल एक दुष्कर्म आरोपी की न्यायिक हिरासत में हुई संदिग्ध मौत के बाद सवालों के घेरे में आ गई है। इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है, और एक मानवाधिकार कार्यकर्ता विनय कुमार पाण्डेय,एडवोकेट/मानवाधिकार कार्यकर्ता / प्रेसिडेंट (बार्डर लायर्स ट्र०) ने इसे ‘मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन’ बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत दर्ज कराई है।शिकायत के अनुसार, सैमहरवां, तहसील-नौतनवां निवासी हरिवंश (42 वर्ष), जो विगत लगभग छह महीनों से बलात्कार के आरोप में महराजगंज जिला जेल में बंद था, की मंगलवार (16.12.2025) सुबह अचानक तबियत बिगड़ गई। उसे तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

न्यायिक निगरानी की आवश्यकता

एडवोकेट और मानवाधिकार कार्यकर्ता विनय कुमार पाण्डेय ने इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की नई दिल्ली स्थित अध्यक्ष को एक औपचारिक शिकायत भेजी है। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए घटना की तत्काल और निष्पक्ष जाँच की माँग की है।

पाण्डेय ने अपनी शिकायत में जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीन गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं:

चिकित्सा सुविधा: क्या बंदी को समय पर और पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई?

लापरवाही/अमानवीय व्यवहार: क्या जेल प्रशासन द्वारा किसी प्रकार की लापरवाही या अमानवीय व्यवहार किया गया?

उत्पीड़न: क्या यह मृत्यु हिरासत में उत्पीड़न या मानसिक दबाव के कारण हुई है?

‘संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन’

शिकायतकर्ता विनय कुमार पाण्डेय ने कहा कि न्यायिक हिरासत में मौत होना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अन्य मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है। उन्होंने जोर दिया कि यह घटना प्रथम दृष्टया न्यायिक निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता की माँगे:

उक्त प्रकरण की तत्काल निष्पक्ष जाँच करवाई जाए।

यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अमानवीय व्यवहार प्रमाणित हो, तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही की जाए।

मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा और न्याय दिलाया जाए।

विनय कुमार पाण्डेय (प्रेसिडेंट, बॉर्डर लायर्स ट्रस्ट) ने NHRC से इस मामले की गंभीरता को समझते हुए मानवाधिकारों की रक्षा के लिए उचित कार्यवाही करने का निवेदन किया है।

इस मामले पर जिला जेल प्रशासन या संबंधित सरकारी अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। स्थानीय प्रशासन पर अब NHRC की संभावित कार्यवाही और जाँच के नतीजों पर नज़र रहेगी।

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