प्रदेश में संपत्ति की खरीद-बिक्री को और अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने रजिस्ट्री नियमों में बड़ा बदलाव किया है। सोमवार से लागू हुए नए सर्किल रेट के साथ ही अब संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए ‘जियोटैग फोटोग्राफ’ और ‘प्रॉपर्टी यूनिक आईडी’ को अनिवार्य कर दिया गया है।
स्टाम्प एवं निबंधन विभाग द्वारा जारी इन नए नियमों का सीधा उद्देश्य संपत्ति के सही स्थान और उसके मूल्यांकन में सटीकता लाना है।
रजिस्ट्री के लिए प्रमुख अनिवार्यताएँ
नए नियमों के तहत, संपत्ति की रजिस्ट्री कराते समय निम्नलिखित दस्तावेज़ और विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक होगा:
- जियोटैग फोटोग्राफ: संपत्ति का एक जियोटैग फोटो अनिवार्य होगा, जिसमें अक्षांश (Latitude) और देशांतर (Longitude) प्रदर्शित होने चाहिए। इससे संपत्ति की भौगोलिक स्थिति सत्यापित हो सकेगी।
- यूनिक आईडी: प्रत्येक संपत्ति के लिए एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूनिक आईडी) आवश्यक होगी।
- रूट मैप: संपत्ति का रूट मैप (मार्ग नक्शा) जमा करना होगा।
- निर्माण वर्ष: भवन या फ्लैट के निर्माण का वर्ष भी अनिवार्य रूप से दर्ज कराना होगा।
- एनजीटी नियमों का पालन: कॉलोनियों के विकास में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
सर्किल रेट में वर्गीकरण और वृद्धि
नए सर्किल रेट में संपत्ति के मूल्यांकन के लिए विस्तृत वर्गीकरण किया गया है, जिससे विभिन्न प्रकार की संपत्तियों के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं:
- मार्गों के आधार पर दरें: राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग, जिला मार्ग, संपर्क मार्ग, खड़ंजा मार्ग और इंटरलॉकिंग मार्गों के लिए अलग-अलग सर्किल रेट तय किए गए हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों का मूल्यांकन: नगर निगम में शामिल किए गए विकासशील गांवों का अलग से मूल्यांकन किया गया है। इन गांवों को ‘क’, ‘ख’, ‘ग’, और ‘घ’ जैसी चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप सर्किल रेट में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है।
अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क का प्रावधान
कुछ विशेष परिस्थितियों में क्रेताओं को अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क चुकाना होगा:
- कॉर्नर प्रॉपर्टी: दो सड़कों के कोने पर स्थित संपत्ति की रजिस्ट्री पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क देना होगा।
- कॉर्नर और पार्क: यदि संपत्ति दो सड़कों के कॉर्नर पर है और उसके साथ पार्क भी लगा हुआ है, तो 20 प्रतिशत अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क देना होगा।
- बोरवेल/सबमर्सिबल: यदि संपत्ति में बोरवेल या सबमर्सिबल पंप लगा है, तो इसके लिए एक लाख रुपये का अतिरिक्त मूल्य निर्धारित किया गया है।
वाणिज्यिक संपत्तियों के मूल्यांकन में बदलाव
वाणिज्यिक संपत्तियों के मूल्यांकन के नियम भी बदले गए हैं। अब उनका मूल्यांकन एकल दुकान और बड़े वाणिज्यिक अधिष्ठानों के आधार पर अलग-अलग किया जाएगा। बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में दुकानों का मूल्यांकन कार्पेट एरिया की दरों के आधार पर होगा, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता आ सकेगी।
एआईजी स्टाम्प राकेश चंद्रा ने बताया कि इन बदलावों से न केवल सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि संपत्ति के मूल्यांकन में पारदर्शिता आएगी और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा।

