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सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए हाई पावर इंडक्शन सुपरवाइजरी कमेटी का गठन किया है, जो आगामी हाईकोर्ट इंडक्शन (प्रेरण) प्रक्रिया और इससे जुड़ी शिकायतों की निगरानी करेगी। यह कमेटी न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं से संबंधित एक लंबित मामले (एम.पी. वरुण बनाम बार काउंसिल ऑफ इंडिया) में दिए गए निर्देश के अनुपालन में गठित की गई है।
बार काउंसिल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति में देश के कई पूर्व न्यायाधीशों को शामिल किया गया है, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
ये हैं कमेटी के प्रमुख सदस्य:
समिति की अध्यक्षता झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री रविरंजन करेंगे।
अन्य प्रमुख सदस्यों में इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री ए.के. माथुर, तथा दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति रेखा पल्ली शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्रीमती सुशीला सिंह समिति की सलाहकार (एडवाइजर) होंगी।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री रविशंकर और इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री बी.डी. मिश्र भी समिति के महत्वपूर्ण सदस्य होंगे।
शिकायतों के लिए अंतिम समय सीमा:
समिति की पहली ऑनलाइन बैठक 06 दिसंबर 2025 को आयोजित की गई, जिसमें चुनाव और प्रेरण संबंधी शिकायतों के निपटारे पर चर्चा हुई। काउंसिल के सदस्यों को सूचित किया गया है कि इंडक्शन और चुनाव से संबंधित सभी शिकायतें 31 जनवरी 2026 तक कमेटी के समक्ष प्रस्तुत की जा सकती हैं।
समिति इन सभी शिकायतों की सुनवाई और जांच के बाद, 28 फरवरी 2026 तक अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी। विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि सिविल न्यायालय या हाईकोर्ट इंडक्शन सुपरवाइजरी कमेटी के निर्णय के विरुद्ध कोई याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी।
