प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोडीन युक्त कफ सीरप के अवैध कारोबार से जुड़े मामले में आरोपित बनाए गए 44 लोगों को बड़ी अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई की तारीख तक इन सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने बीरेंद्र लाल वर्मा और शुभम जायसवाल समेत कुल 44 आरोपियों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। इन सभी आरोपियों के खिलाफ प्रदेश के विभिन्न पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसे याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी गई थी।
NDPS एक्ट पर सवाल
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने न्यायालय में जोरदार तर्क प्रस्तुत किया कि यह पूरा मामला नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज (NDPS) एक्ट के तहत नहीं चलाया जा सकता। वकीलों ने दलील दी कि जिस पदार्थ का कारोबार किया गया, उसे NDPS अधिनियम के तहत ‘निर्मित दवा’ (Manufactured Drug) की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। उनका कहना था कि यदि कोई वैधानिक कार्रवाई अपेक्षित थी, तो वह केवल ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के प्रावधानों के तहत ही की जानी चाहिए थी।
जांच में सहयोग की शर्त
कोर्ट ने आरोपियों को अंतरिम राहत देते हुए यह शर्त भी रखी कि वे जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब भी जांच अधिकारी द्वारा उन्हें बुलाया जाएगा, वे उपस्थित होंगे। न्यायालय ने जांच जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है।
इस प्रकरण में अगली सुनवाई 17 दिसंबर को निर्धारित की गई है।

