
पुलिस की लापरवाही पर भी टिप्पणी, पीड़िता की गवाही को माना सर्वश्रेष्ठ साक्ष्य
महराजगंज:– महराजगंज की सत्र न्यायालय ने एक सामूहिक बलात्कार और आपराधिक धमकी के सनसनीखेज मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है। न्यायालय ने पुलिस जांच में हुई गंभीर लापरवाही पर भी सख्त टिप्पणी की है।
न्यायालय सेशन न्यायाधीश, महराजगंज, श्री अरविन्द मलिक (एच०जे०एस०) की अदालत ने सेशन परीक्षण संख्या-36/2019 में अभियुक्तगण नेवास उर्फ रामनेवास (35), हरिकेश गिरी (25) और रिकेश गिरी (26) को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376डी (सामूहिक बलात्कार) और धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दोषी करार दिया।
घटना और फैसला
यह मामला 10 मार्च 2016 का है, जब शाम करीब 7:30 बजे पुरन्दरपुर थाना क्षेत्र के करमहवा बुजुर्ग गांव में पीड़िता अपने घर में अकेली खाना बना रही थीं। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, तीनों अभियुक्त पीड़िता के घर में घुस आए, मुंह दबाकर उसे घसीटकर घर के पीछे की घारी (झोंपड़ीनुमा जगह) में ले गए। वहां चाकू दिखाकर जान से मारने की धमकी दी और समूह गठित कर सामूहिक बलात्कार किया।
जब पीड़िता की माँ घर लौटीं, तो उन्होंने आरोपियों को भागते हुए देखा, जिसके बाद पीड़िता ने उन्हें पूरी घटना बताई।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
निर्णय में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। घटना के बाद पीड़िता ने 14 मार्च 2016 को FIR दर्ज कराई, लेकिन विवेचक ने उसी दिन, यानी एक ही दिन में, बिना कोई चिकित्सकीय या आवश्यक वैज्ञानिक परीक्षण कराए, मामले में अंतिम रिपोर्ट (Final Report/Closure Report) दाखिल कर दी थी।
पीड़िता ने पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ न्यायालय में प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल किया, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने स्वीकार करते हुए अंतिम रिपोर्ट को खारिज कर दिया और मामले को परिवाद (शिकायत) के रूप में दर्ज कर विचारण के लिए तलब किया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चिकित्सीय परीक्षण न हो पाना पुलिस अधिकारियों की लापरवाही है, लेकिन बलात्कार जैसे मामलों में पीड़िता की गवाही सर्वश्रेष्ठ साक्ष्य होती है। न्यायालय ने पाया कि पीड़िता ने घटना को पूरी विश्वसनीयता के साथ साबित किया है और जिरह में भी उसकी गवाही को खंडित नहीं किया जा सका।
दण्डादेश का विवरण
- धारा 376डी (सामूहिक बलात्कार): प्रत्येक दोषी को 20-20 वर्ष का कठोर कारावास और 25,000-25,000 रुपये का अर्थदण्ड।
- धारा 506 (आपराधिक धमकी): प्रत्येक दोषी को 2-2 वर्ष का कठोर कारावास।
- सभी सज़ाएं साथ-साथ चलेंगी।
- दोषियों द्वारा जमा किए गए अर्थदण्ड की कुल राशि में से 50,000 रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे।
दोषी करार दिए गए अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार भेज दिया गया है।
