इंस्पेक्टर मौत का मामला मीनाक्षी ‘गैंग’ की तलाश: एसआईटी ऐसे खोल रही है सहयोगियों के राज

जालौन मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अब मीनाक्षी शर्मा को ‘अकेला अपराधी’ न मानकर, उसे ब्लैकमेलिंग के एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा मानकर काम कर रही है।
I. कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और डिजिटल साक्ष्य का विश्लेषण
यह मीनाक्षी के सहयोगियों तक पहुंचने का सबसे अहम जरिया है:
1. 9 पुलिसकर्मियों की पहचान: मीनाक्षी के मोबाइल फोन के CDR और जब्त किए गए चैट/फोटो के आधार पर उन 9 पुलिसकर्मियों की पहचान की जा रही है, जिनसे उसके अवैध संबंध थे और जिनसे उसने कथित तौर पर ज्वेलरी, Apple मोबाइल जैसे महंगे गिफ्ट्स और पैसे ऐंठे थे।
2. नियमित संपर्क वाले अधिकारी: उन बड़े अधिकारियों और थानेदारों की CDR भी खंगाली जा रही है, जो मीनाक्षी के साथ नियमित संपर्क में थे। जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या इन अधिकारियों ने मीनाक्षी को विभागीय संरक्षण दिया था और इसके बदले में क्या लिया था।
3. संदिग्ध व्यक्तियों की निगरानी: जांच दल मीनाक्षी के परिवार के सदस्यों और उन सभी नागरिकों पर भी नजर रखे हुए है, जिनके माध्यम से वह कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग का रैकेट चलाती थी।
4. रिकवरी : मीनाक्षी द्वारा अवैध रूप से प्राप्त की गई ज्वेलरी, नकदी और महंगे सामान (जैसे iPhone) को उन पुलिसकर्मियों या व्यक्तियों से बरामद करने की कार्रवाई की जा रही है, जिनके पास ये सामान भेजे गए थे।
II. विभागीय जांच और कार्रवाई
सहयोगियों की पहचान होने के बाद, उन पर कठोर विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी:
1. पूछताछ के लिए समन: 9 संदिग्ध पुलिसकर्मियों (सिपाहियों और संभवतः अन्य अधिकारियों) को जल्द ही पूछताछ के लिए समन भेजा जाएगा। उनसे मीनाक्षी के साथ उनके संबंधों, लेन-देन और विभागीय नियमों के उल्लंघन के बारे में सवाल किए जाएंगे।
2. निलंबन/बर्खास्तगी: यदि CDR और अन्य साक्ष्यों से यह सिद्ध होता है कि ये पुलिसकर्मी मीनाक्षी के ब्लैकमेलिंग रैकेट का हिस्सा थे, तो उन्हें न सिर्फ निलंबित किया जाएगा, बल्कि सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
3. ‘तीसरा व्यक्ति’: सीसीटीवी फुटेज में मीनाक्षी को थाने तक छोड़ने वाले संदिग्ध व्यक्ति की पहचान की जा रही है। अगर वह भी पुलिसकर्मी निकला, तो उसकी भूमिका की गंभीरता से जांच की जाएगी कि क्या वह अरुण कुमार राय को दबाव डालने के लिए मीनाक्षी की मदद कर रहा था।
III. ब्लैकमेलिंग रैकेट पर केस
मीनाक्षी पर अब सिर्फ हत्या/आत्महत्या के लिए उकसाने का नहीं, बल्कि संगठित ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली का भी मामला दर्ज करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि उसके पूरे नेटवर्क को तोड़ा जा सके।
वर्तमान स्थिति: पुलिस की प्राथमिकता फिलहाल इंस्पेक्टर की मौत की गुत्थी सुलझाना है, लेकिन इसके साथ ही मीनाक्षी के सहयोगियों की पहचान और उनके खिलाफ सबूत जुटाने का काम भी तेजी से चल रहा है। इस जांच के परिणामस्वरूप यूपी पुलिस विभाग में कई और बड़े खुलासे और कठोर कार्रवाई होने की संभावना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *