पॉक्सो अदालत का फैसला:तीनों आरोपी बरी

पीड़िता के बयान को मिली प्रमुखता, पिता ने झूठा दर्ज कराया था मुकदमा

महाराजगंज। विशेष न्यायाधीश, अनन्य न्यायालय (पॉक्सो अधिनियम), महराजगंज ने एक महत्वपूर्ण फैसले में विशेष सत्र परीक्षण संख्या-99/2017 में आरोपी विदेश उपाध्याय, दुर्गेश उपाध्याय, और बबुन्दर उपाध्याय को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष अभियुक्तों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है।

🧑‍⚖️ पीड़िता का साक्ष्य रहा निर्णायक

न्यायालय ने इस मामले में पीड़िता के बयान को सबसे अधिक विश्वसनीय और सर्वोत्तम साक्षी माना।

झूठा मुकदमा: पीड़िता ने स्पष्ट रूप से कथन किया कि उसके पिता ने अभियुक्तगण के विरूद्ध झूठा मुकदमा लिखाया है।

बलात्कार के आरोप से इनकार: पीड़िता ने अपने शपथ बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि अभियुक्त विदेश उपाध्याय ने उसके साथ बलात्कार नहीं किया। उसने मारपीट किए जाने और जान माल की धमकी दिए जाने से भी इनकार किया।

पुलिस का दबाव: पीड़िता ने यह भी कहा कि उसने पुलिस के दबाव में न्यायालय में बयान दिया था, और धारा 164 दं०प्र०सं० का बयान बलिराम दरोगा के डराने धमकाने पर दिया था।

👧 पीड़िता की आयु पर अहम निष्कर्ष

न्यायालय के समक्ष एक महत्वपूर्ण विचारणीय बिंदु यह था कि क्या पीड़िता घटना की तारीख (11.12.2016) को पॉक्सो अधिनियम की धारा 2(घ) के अनुसार बालक थी।

स्वयं का बयान: पीड़िता ने अपने शपथ बयान में घटना के समय अपनी उम्र 21 वर्ष बताई थी।

मेडिकल रिपोर्ट: पीड़िता की मेडिकल जांच के बाद जारी आयु प्रमाण पत्र (दिनांक 24.12.2016) में उसकी आयु लगभग 18 वर्ष अंकित थी।

निष्कर्ष: न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि घटना की तिथि पर पीड़िता 18 वर्ष से अधिक उम्र की थी अर्थात वह पॉक्सो अधिनियम की धारा 2(घ) के अनुसार बालक की श्रेणी में नहीं आती।

बचाव पक्ष के साक्ष्य और डॉक्टरी रिपोर्ट

बचाव पक्ष के साक्षी  योगेन्द्रनाथ त्रिपाठी ने अपने बयान में कथन किया कि अभियुक्त विदेश उपाध्याय घटना वाली दिनांक (10.12.2016) से लेकर 13.12.2016 तक उनके साथ हरियाणा में था।

इसके अलावा, पीड़िता की डॉक्टरी जांच (दिनांक 14.12.2016) में उसके जननांग पर या शरीर पर किसी प्रकार की कोई चोट नहीं पाई गई थी। पैथोलॉजी रिपोर्ट के अनुसार, किसी प्रकार का शुक्राणु या गोनोकोकाई नहीं पाया गया था।

⚖️ न्यायालय का अंतिम निर्णय

न्यायालय ने पाया कि अभियोजन अभियुक्तों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है।

तदनुसार, न्यायालय ने विदेश उपाध्याय को भारतीय दण्ड संहिता की धारा-376, 323/34, 504, 506 एवं पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/4 के आरोपों से, और सहअभियुक्तगण बबुन्दर उपाध्याय व दुर्गेश को धारा-323/34, 504, 506 के आरोपों से दोषमुक्त किया।

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