
लखनऊ: भोजपुरी लोक गायिका और यूट्यूबर नेहा सिंह राठौड़ की कानूनी लड़ाई तेज़ हो गई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ द्वारा उनकी अग्रिम ज़मानत याचिका ख़ारिज किए जाने के बाद, राठौड़ ने अब राहत के लिए देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने का फैसला किया है।नेहा राठौड़ ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह उच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करती हैं, लेकिन अपने अधिकारों के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाएंगी। उन्होंने पुलिस को सहयोग करने की बात भी दोहराई है।
पूरा मामला क्या है? जानें मुख्य बिंदु
नेहा राठौड़ पर उत्तर प्रदेश में कई शिकायतें और एफआईआर दर्ज हैं। वर्तमान कानूनी संकट की जड़ें उनके एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ी हैं:
मूल आरोप: उनके ख़िलाफ़ मुख्य मामला पहलगाम आतंकी हमले (22 अप्रैल) पर उनकी टिप्पणी से संबंधित है, जिसकी शिकायत लखनऊ के हज़रतगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई थी।
विवादास्पद पोस्ट: 23 अप्रैल को उन्होंने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार पर जाति और धर्म के आधार पर राजनीति करने का आरोप लगाया था। उन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ कथित अपमानजनक टिप्पणियाँ करने की भी शिकायतें हैं।
शिकायतकर्ता: यह शिकायत कवि अभय प्रताप सिंह, उर्फ़ अभय सिंह, ने दर्ज कराई थी।
शिकायत का आधार: अभय सिंह का आरोप है कि राठौड़ की पोस्ट से जाति-आधारित नफ़रत और राष्ट्र-विरोधी भावनाएँ फैल सकती हैं।
गायिका का पक्ष: नेहा राठौड़ लगातार अपनी टिप्पणियों का बचाव कर रही हैं। उनका कहना है कि उनके शब्दों की गलत व्याख्या की गई। उनकी मंशा प्रधानमंत्री से हमले के बाद पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल पूछना था, न कि किसी प्रकार की नफ़रत फैलाना।
आगे क्या? कानूनी जानकारों की राय
उच्च न्यायालय से ज़मानत न मिलने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट से नेहा राठौड़ को क्या राहत मिलती है। कानूनी विशेषज्ञ इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के बीच की एक नाज़ुक लड़ाई बता रहे हैं।
फिलहाल, भोजपुरी गायिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पुलिस से सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन अपने हक़ के लिए शीर्ष अदालत में न्याय की गुहार लगाएंगी।
