40 हजार के लिए दोस्तों ने पार की हैवानियत की हदें, कुल्हाड़ी से सिर काटकर धड़ से किया अलग

गोरखपुर/महराजगंज: पैसे के लेन-देन को लेकर रिश्तों का कत्ल और विश्वासघात की एक ऐसी दास्तां सामने आई है, जिसने पूरे पूर्वांचल को दहला कर रख दिया है। महज 40 हजार रुपये (कुछ रिपोर्ट्स में 26 हजार) के विवाद में दोस्तों ने ही अपने जिगरी यार को मौत के घाट उतार दिया। दरिंदगी ऐसी कि हत्या के बाद पहचान छिपाने के लिए कुल्हाड़ी से उसका सिर काटकर धड़ से अलग कर दिया और लाश के टुकड़ों को महराजगंज के जंगलों में फेंक आए।
क्या है पूरा मामला?
गोरखपुर के तिवारीपुर थाना क्षेत्र के सूरजकुंड कॉलोनी का रहने वाला अंबुज भारद्वाज उर्फ रिशु बीते 26 नवंबर से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता था। परिवार वाले अनहोनी की आशंका जता रहे थे, लेकिन पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिल रहा था। जब पुलिस ने सर्विलांस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाले, तो शक की सुई अंबुज के ही दोस्तों पर आकर टिक गई।
पुलिसिया पूछताछ में खौफनाक खुलासा
पुलिस ने जब अंबुज के दोस्त आयुष सिंह और उसके साथियों को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने जो सच उगला, उसे सुनकर पुलिस के भी पैरों तले जमीन खिसक गई। आरोपियों ने कबूला कि पैसों के लेन-देन को लेकर उनका अंबुज से विवाद चल रहा था। इसी रंजिश में उन्होंने अंबुज को धोखे से बुलाया, उसे शराब पिलाई और फिर कार में ले जाकर उसकी हत्या कर दी।
कुल्हाड़ी से काटा सिर, अलग-अलग जगहों पर फेंके शरीर के टुकड़े
हत्यारों ने हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए अंबुज के शव को महराजगंज जिले के भिटौली थाना क्षेत्र में ठिकाने लगाया। पहचान मिटाने के मकसद से उन्होंने कुल्हाड़ी से उसका सिर काट दिया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर भिटौली के भैंसा-पिपरा खादर मार्ग के पास से सिर और वहां से करीब 10 किलोमीटर दूर नहर किनारे झाड़ियों से धड़ बरामद किया।
एसएसपी का बयान
गोरखपुर के एसएसपी (SSP) ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि यह पूरी तरह से ‘ब्लाइंड मर्डर केस’ था। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से 48 घंटे के भीतर इसका पर्दाफाश किया। हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी और कार को बरामद कर लिया गया है। आरोपियों पर अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।
परिवार में कोहराम
इकलौते बेटे का शव इस हालत में देख परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बूढ़े पिता ने कांपते हाथों से जब बेटे के शव की पहचान की, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। इस जघन्य हत्याकांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब दोस्ती और भरोसे की कोई कीमत नहीं बची है?

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