परागपुर तालाब के बाउंड्री पर बने कचरा डम्पिंग यार्ड से जन जीवन और जल जीवन दोनों हो रहा है अस्त व्यस्त।

जहाँ स्वच्छ वातावरण और स्वच्छ पर्यावरण पर सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है वही नगर पंचायत निचलौल से सटे परागपुर ताल के बाउंड्री पर बना कचरा डंपिंग यार्ड में कचरे का पहाड़ अपने दुर्गंध और उसमे सूखे कचरे का खेत मे फैलाव ग्रामीणों राहगीरों और सबसे ज्यादा किसानों के लिए मुसीबत बन रही है मुसीबत भी इस कदर की जीना दूभर हो गया है कुछ भी विस्तार से बताने से पहले ये बता दूं कि NGT के नियम के अनुसार किसी भी तरह के कचरे का निस्तारण तालाब क्षेत्र से लगभग 600 मीटर दूर होना चाहिए अब आइये जानते हैं विस्तार से
निचलौल से सटे बहुत पुराना तालाब है जिसे परागपुर ताल के नाम से जानते तालाब के एक तरफ परागपुर गाँव तो दूसरी तरफ टिकुलहिया गांव हैं और तालाब से सटे किसानों की खेती है वही टिकुलहिया गांव के तरफ तालाब के बाउंड्री पर ही बताया जाता है कि नगर पंचायत निचलौल की जमीन है जिसे कचरा डंपिंग यार्ड बना दिया गया है अब आलम यह हो गया है कि कचरे की दुर्गंध लोगो को चैन से जीने नही दे रही है और कचरे का का खेतो में फैलाव होने व कचरे के सड़न से उत्तपन्न फसल के दुश्मन कीड़ो की संख्या बढ़ जाने से किसान के जीवकोपार्जन के लिए मुसीबत बन गयी है और जो पर्यावरण और वातावरण दूषित हो रहा है और उससे होने वाली सम्भावित बीमारियों का जो खतरा मंडरा रहा है उसकी तो अभी बात ही अलग है एक बार जिले पर हुए एनजीटी की मीटिंग में वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के द्वारा जिलाधिकारी को अवगत कराया गया था जिसके बाद जिलाधिकारी महराजगंज के आदेश से तत्काल कचरा डंपिंग रोक दिया गया था लेकिन उस आदेश का पालन बस चंद दिनों के लिए किया गया था उसके बाद से अनवरत कचरा का पहाड़ बनाना आज भी जारी है और ऐसे ही चलता रहा तो वहाँ के आस पास का जन जीवन और जल जीवन दोनों ही अस्त व्यस्त और अंत मे नष्ट हो जाएगा

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