मनरेगा बड़े वित्तीय घोटाले की आशंका से महराजगंज जिले के निचलौल विकास खंड में हड़कंप मच गया है। धमौर ग्राम पंचायत के दर्जनों पीड़ित मजदूरों ने सामूहिक रूप से मुख्य विकास अधिकारी को लिखित शिकायत देकर ग्राम रोजगार सेवक पर लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया है। मजदूरों ने इस फर्जीवाड़े में स्थानीय ब्लॉक अधिकारियों की भी खुली मिलीभगत का दावा किया है, जिसके चलते यह घोटाला सिर्फ ग्राम पंचायत तक सीमित न रहकर पूरे ब्लॉक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अनियमितताओं की लंबी सूची-
फर्जी हस्ताक्षर बनाकर मजदूरों के नाम पर भुगतान किया गया।
मनरेगा मजदूरों के खातों से बिना काम कराए ही धोखाधड़ी से धन निकाल लिया गया।
जांच और निरीक्षण के नाम पर निजी खर्च के लिए फर्जी बिल बनाकर सरकारी खजाने से धन का गबन किया गया।
ग्रामीणों ने ‘चक मार्ग’ (कच्ची सड़क) मरम्मत के तीन विशिष्ट कार्यों का उल्लेख किया, जहां फर्जी अनुमान लगाए गए और कागजों पर भुगतान जारी कर दिया गया। मजदूरों का आरोप है कि यह पैसा या तो फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दिया गया या फिर दूसरे गांव के लोगों को दे दिया गया, जबकि असली मेहनत धमौर के मजदूरों ने की थी।
घोटाले की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब ग्रामीण ब्लॉक कार्यालय के कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब वे अपनी शिकायत लेकर निचलौल ब्लॉक कार्यालय पहुंचे तो कर्मचारियों ने उन्हें धमकाकर भगा दिया और खुली चुनौती देते हुए कहा कि, जहां जाना है जाओ शिकायत करो हमारा कोई कुछ नहीं कर सकता।यह बयान स्पष्ट रूप से ब्लॉक स्तर पर व्यापक मिलीभगत और भ्रष्टाचार के संरक्षण की ओर इशारा करता है।क्या है ये अब यही देखना बाकी रह गया था कहाँ से आते हैं ऐसे लोग जो खुद चोरी करते हैं और कुछ कहने पर उल्टे ही सीना जोरी भी करते हैं
क्या ऐसे लोगों के रहते गाँव की विकास की परिकल्पना भी किया जा सकता है?
ग्रामीणों ने लगाया रोजगार सेवक पर मनरेगा में लाखों रुपये की वित्तीय घोटाले का आरोप।
