डीजल की किल्लत ने ऐसी तबाही मचाई है कि पूरा जनजीवन अस्त व्यस्त हो चुका है सबसे बड़ा प्रभाव तो किसानों पर पड़ा है क्योंकि अब खरीफ की फसल की बुवाई होने को है अब धान की बेहन गिराने के लिए किसानों को अपने खेत की जुताई एवं धान का बेहन गिराने का सिलसिला शुरू हो गया है धान के बेहन गिरने के 21 से 22 दिन के बाद से धान की रोपाई भी होनी शुरू होगी जिसके लिए खेतों की जुताई और धान रोपाई के लिए पानी की आवश्यकता होगी और जुताई करने के लिए ईंधन की खपत होगी जिसमें ट्रैक्टर में डीजल और पंपिंग सेट में भी डीजल की आवश्यकता होगी पानी से सिंचाई करने के लिए भी डीजल की आवश्यकता और उसकी जुताई करने के लिए भी डीजल की आवश्यकता अब ऐसे में जिस तरह से पेट्रोल पंप ड्राई हो रहे हैं और जहां मिल रहे हैं वहां पर हजारों की संख्या में भीड़ डीजल के लिए लाइन लगाकर खड़ी है दिन दोपहर रात सुबह पेट्रोल पम्पो पर जमा भीड़ में खेती को लेकर निराशा ही निराशा दिख रही है ऐसे में इतना बड़ा डीजल की किल्लत वाली तबाही कैसे झेल पाएगा किसान यह एक चिंता का विषय बना हुआ है पूरे महाराजगंज जनपद में अधिकांश पेट्रोल पंप ड्राई हो चुके हैं अब तो अगर किसी पेट्रोल पंप पर डीजल और पेट्रोल आ रहा है तो वहां हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो जा रही है डीजल पेट्रोल के लिए,
सबसे बड़ा चिंता का विषय यह है कि अभी जो खेतों की जुताई के लिए ट्रैक्टर में डीजल और धान की बेहन को गिराने के लिए पंपिंग सेट में डीजल की आवश्यकता है जिसको पाने के लिए किसान दिन रात एक किये हुए है ऐसे में कैसे हो खेत की जुताई और कैसे गिरेगा धान का बेहन अगर धान के बेहन गिरने में लेट हुआ तो फिर धान की रोपाई कैसे होगी यह एक चिंता का विषय बना हुआ है अगर जल्द ही इसका कोई निराकरण नहीं हुआ तो कृषि प्रधान इस देश में कृषि की दशा ही खराब हो जाएगी।
डीजल की किल्लत ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें
