सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 7 साल से कम सजा वाले अपराधों में जमानत की शर्तें लागू नहीं, हाईकोर्ट का आदेश रद्द

ब्यूरो रिपोर्ट

​सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की व्याख्या करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन गैर-जमानती अपराधों में अधिकतम सजा सात साल तक है, वहां जमानत देते समय BNSS की धारा 480(3) के तहत निर्धारित कठोर शर्तें नहीं थोपी जा सकतीं।

​जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की खंडपीठ ने इस कानूनी बिंदु को स्पष्ट करते हुए आरोपी की जमानत बहाल कर दी है।

​क्या है पूरा मामला?

​यह मामला मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत अवैध शराब रखने के आरोपी से जुड़ा है, जिसमें अधिकतम सजा तीन वर्ष निर्धारित है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (इंदौर पीठ) ने आरोपी को जमानत देते समय कुछ शर्तें लगाई थीं। बाद में, राज्य सरकार ने यह दावा करते हुए जमानत रद्द करने की मांग की कि आरोपी ने शर्तों का उल्लंघन किया है और फिर से वैसा ही अपराध किया है। हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए आरोपी की जमानत रद्द कर दी थी।

​सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: ‘जब शर्तें ही वैध नहीं, तो उल्लंघन कैसा?’

​सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि धारा 480(3) की शर्तें केवल उन्हीं अपराधों पर लागू होती हैं जिनमें सजा सात वर्ष या उससे अधिक हो।

अदालत के फैसले के मुख्य बिंदु:

  1. कानूनी सीमा: चूंकि संबंधित अपराध में अधिकतम सजा केवल तीन साल थी, इसलिए धारा 480(3) के तहत शर्तें लगाना शुरुआत से ही (Ab-initio) विधि सम्मत नहीं था।
  2. जमानत बहाली: कोर्ट ने कहा कि जब शर्तें कानूनी रूप से लागू ही नहीं होतीं, तो उनके उल्लंघन के आधार पर जमानत रद्द करना न्यायसंगत नहीं है।
  3. स्पष्टीकरण: बेंच ने साफ किया कि कम सजा वाले मामलों में मजिस्ट्रेट या कोर्ट को वे शर्तें लगाने का अधिकार नहीं है जो केवल गंभीर अपराधों (7 साल से ऊपर) के लिए आरक्षित हैं।

​कानूनी विशेषज्ञों की राय

​कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस स्पष्टीकरण से निचली अदालतों में जमानत प्रक्रियाओं में अधिक स्पष्टता आएगी और आरोपियों को बेवजह की कठोर शर्तों से राहत मिलेगी, खासकर उन मामलों में जहाँ अपराध की प्रकृति बहुत गंभीर नहीं है।

विधिक डेस्क

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *